July 3, 2026

Rupee Falls: डॉलर के मुकाबले रुपया 95.34 पर बंद, सस्ते क्रूड ऑयल का भी नहीं मिला पूरा सहारा

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भारतीय रुपये में गुरुवार को शुरुआती मजबूती देखने को मिली लेकिन कारोबारी सत्र के अंत तक यह बढ़त टिक नहीं सकी। डॉलर के मुकाबले रुपया 18 पैसे की गिरावट के साथ 95.34 प्रति डॉलर (अनंतिम) पर बंद हुआ। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से रुपये को शुरुआती समर्थन मिला था लेकिन आयातकों और कॉरपोरेट कंपनियों की ओर से डॉलर की मजबूत मांग के कारण रुपया दबाव में आ गया। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 94.95 के स्तर पर खुला और दिनभर 94.90 से 95.40 के दायरे में कारोबार करता रहा। इससे पहले बुधवार को रुपया 60 पैसे की कमजोरी के साथ 95.16 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

FII की बिकवाली और डॉलर की मांग से बढ़ा दबाव

फॉरेक्स विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिकी Federal Reserve के चेयरमैन की नरम टिप्पणियों और डॉलर इंडेक्स में कमजोरी की वजह से रुपये की शुरुआत मजबूत रही थी। हालांकि विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और हेजिंग के लिए डॉलर की बढ़ती मांग ने रुपये की बढ़त को खत्म कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान से जुड़े घटनाक्रम, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और विदेशी पूंजी की निकासी फिलहाल रुपये पर दबाव बनाए रख सकती है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के संभावित हस्तक्षेप से रुपये को निचले स्तर पर कुछ सहारा मिल सकता है।

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विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बनी चिंता

जून महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार से ₹49,340 करोड़ की निकासी की। वहीं वर्ष 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों की कुल बिकवाली ₹2.7 लाख करोड़ से अधिक पहुंच चुकी है, जो पूरे 2025 की कुल निकासी से भी ज्यादा है। इस बीच Dollar Index करीब 101 के स्तर पर 0.38% की कमजोरी के साथ कारोबार करता दिखा। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil की कीमत लगभग 1.43% गिरकर 70.55 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही। विशेषज्ञों का अनुमान है कि निकट भविष्य में USD/INR की चाल 95.00 से 95.60 के दायरे में रह सकती है। निवेशकों की नजर अब अमेरिका के रोजगार संबंधी आंकड़ों और अन्य आर्थिक संकेतकों पर रहेगी जिनका असर वैश्विक मुद्रा बाजार पर पड़ सकता है।