July 4, 2026

भारत में E20 पेट्रोल को लेकर ऑटो एक्सपर्ट्स का बयान: ‘इंजन को नुकसान नहीं, पूरी तरह सुरक्षित’

E20

E20

भारत में 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के दिग्गजों ने उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाया है कि यह ईंधन पूरी तरह सुरक्षित है और इससे वाहनों में किसी तरह की घिसावट या जंग (corrosion) की समस्या नहीं होती। Maruti Suzuki और Toyota India सहित कई ऑटो एक्सपर्ट्स ने कहा कि E20 फ्यूल का व्यापक परीक्षण किया गया है और यह न सिर्फ नए बल्कि पुराने वाहनों के लिए भी सुरक्षित है।

Maruti Suzuki का दावा: कोई नुकसान नहीं

Maruti Suzuki India के Corporate Affairs Senior Executive Officer राहुल भारती ने कहा कि कंपनी ने E10 वाहनों पर E20 फ्यूल का सभी पैरामीटर्स पर परीक्षण किया है और किसी तरह की समस्या सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि 2023 से पहले बने वाहनों को लेकर जो चिंता जताई जा रही है, उन पर भी पर्याप्त सुरक्षा परीक्षण किया गया है। उनके अनुसार, “E20 के इस्तेमाल से इंजन में घिसावट, जंग या किसी भी पार्ट्स की लाइफ पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता।”

E20 पेट्रोल क्या है?

E20 पेट्रोल में 20% एथेनॉल और 80% पारंपरिक पेट्रोल मिलाया जाता है। एथेनॉल एक बायोफ्यूल है, जो गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार होता है। यह ईंधन कम प्रदूषण करता है और देश की कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने में मदद करता है। यह ईंधन पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत स्वच्छ माना जाता है, हालांकि इसके लिए वाहनों का अनुकूल होना जरूरी होता है।

सरकार की योजना और वैज्ञानिक परीक्षण

पूर्व Engineers India Ltd की चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर वर्षिका शुक्ला ने कहा कि E20 को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है और इसके लिए दोपहिया और चारपहिया वाहनों पर विस्तृत वैज्ञानिक परीक्षण किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह भारत के डिकार्बोनाइजेशन (कार्बन उत्सर्जन घटाने) की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इसमें सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया है।

Toyota का बयान: ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी कदम

Toyota Kirloskar Motor के कॉर्पोरेट अफेयर्स और गवर्नेंस के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट विक्रम गुलाटी ने कहा कि एथेनॉल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि हाल ही में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई बाधाएं इस बात की याद दिलाती हैं कि देश को आयातित तेल पर निर्भरता कम करनी चाहिए। उनके अनुसार एथेनॉल कृषि आधारित उत्पादों से बनता है और यह किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद करता है।

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माइलेज को लेकर भ्रम पर सफाई

BPCL के पूर्व डायरेक्टर (रिफाइनरी) आर. रामचंद्रन और IGL के पूर्व चेयरमैन राज कुमार दुबे ने कहा कि E20 को लेकर माइलेज कम होने जैसी शिकायतें वैज्ञानिक परीक्षणों में ज्यादा नहीं पाई गई हैं। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में जो फर्क महसूस होता है, वह ड्राइविंग पैटर्न, पुराने वाहनों की स्थिति या सामान्य घिसावट की वजह से हो सकता है। विशेषज्ञों ने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे व्यक्तिगत अनुभवों के बजाय परीक्षण एजेंसियों के वैज्ञानिक डेटा पर भरोसा करें।