Bima Bharosa: बीमा क्लेम अटक जाए या रिजेक्ट हो जाए तो क्या करें? जानिए ‘बीमा भरोसा’ से शिकायत करने का पूरा तरीका
Bima Bharosa
Bima Bharosa: बीमा पॉलिसी लेते समय ज्यादातर लोग प्रीमियम, कवर और फायदे पर ध्यान देते हैं, लेकिन क्लेम के समय प्रक्रिया की जानकारी उतनी ही जरूरी हो जाती है। अगर बीमा कंपनी आपका क्लेम खारिज कर देती है, भुगतान में देरी करती है, गलत तरीके से पॉलिसी बेचने का आरोप है या किसी सेवा से जुड़ी शिकायत का समाधान नहीं हो रहा है, तो परेशान होकर चुप बैठने की जरूरत नहीं है। ऐसे मामलों के लिए नियामक संस्था भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने शिकायत निवारण की एक तय व्यवस्था बनाई है। इस व्यवस्था में सबसे पहले शिकायत संबंधित बीमा कंपनी के Grievance Redressal Officer (GRO) के पास दर्ज करानी होती है। अगर वहां से संतोषजनक समाधान नहीं मिलता या समय पर जवाब नहीं आता, तो मामला IRDAI के Bima Bharosa Portal तक ले जाया जा सकता है।
सबसे पहले बीमा कंपनी में शिकायत करें
IRDAI के नियमों के मुताबिक बीमा कंपनी के हर कार्यालय में एक अधिकारी को Grievance Redressal Officer यानी शिकायत निवारण अधिकारी के रूप में नामित किया जाता है। पॉलिसीधारक अपनी शिकायत सबसे पहले इसी अधिकारी या कंपनी के शिकायत निवारण सेल के पास दर्ज करा सकता है। शिकायत क्लेम रिजेक्शन, भुगतान में देरी, गलत तरीके से पॉलिसी बेचे जाने, पॉलिसी सर्विस या किसी अन्य संबंधित समस्या को लेकर हो सकती है। बीमा कंपनी को मिलने वाली शिकायतों को उसके Complaints Management System (CMS) में दर्ज किया जाता है। डिजिटल माध्यम, सीधे पत्राचार या कॉल सेंटर के जरिए मिलने वाली शिकायतें भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं।
शिकायत मिलने के बाद 14 दिन में समाधान
शिकायत दर्ज होने के बाद बीमा कंपनी को उसे स्वीकार करने की प्रक्रिया पूरी करनी होती है और निर्धारित समयसीमा में समाधान देना होता है। PIB की ओर से जारी जानकारी के अनुसार बीमा कंपनियों को शिकायत का समाधान 14 दिनों के भीतर करना होता है। इसलिए अगर किसी पॉलिसीधारक की शिकायत का समय पर समाधान नहीं होता, तो उसके पास आगे शिकायत बढ़ाने का विकल्प मौजूद रहता है।
समाधान नहीं मिला तो Bima Bharosa Portal पर जाएं
अगर बीमा कंपनी से जवाब नहीं मिलता या दिया गया समाधान पॉलिसीधारक को संतोषजनक नहीं लगता, तो अगला कदम IRDAI के Bima Bharosa Portal का हो सकता है। Bima Bharosa एक एकीकृत शिकायत निगरानी व्यवस्था है, जिसके जरिए बीमा क्षेत्र से जुड़ी शिकायतें दर्ज करने के साथ-साथ उनकी स्थिति पर भी नजर रखी जा सकती है। हालांकि पॉलिसीधारकों को सामान्य तौर पर पहले संबंधित बीमा कंपनी के शिकायत निवारण सेल से संपर्क करना होता है। कंपनी की ओर से समाधान नहीं मिलने या समाधान से संतुष्ट नहीं होने की स्थिति में IRDAI के शिकायत निवारण तंत्र का सहारा लिया जा सकता है।
फोन और ई-मेल से भी शिकायत की सुविधा
अगर कोई पॉलिसीधारक ऑनलाइन पोर्टल का इस्तेमाल नहीं करना चाहता, तो IRDAI के शिकायत निवारण तंत्र से फोन और ई-मेल के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है। शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर 155255 और 1800-4254-732 उपलब्ध हैं। इसके अलावा complaints@irdai.gov.in पर ई-मेल के जरिए भी शिकायत भेजी जा सकती है। IRDAI का कॉल सेंटर बहुभाषी सहायता उपलब्ध कराता है। जानकारी के मुताबिक यह सुविधा 12 भाषाओं में उपलब्ध है।
शिकायत करते समय इन दस्तावेजों को संभालकर रखें
बीमा से जुड़ी शिकायत दर्ज करते समय पॉलिसीधारक को अपनी पॉलिसी से संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज और कंपनी के साथ हुए संवाद को सुरक्षित रखना चाहिए। इनमें पॉलिसी नंबर, क्लेम नंबर, क्लेम रिजेक्शन लेटर, प्रीमियम भुगतान की जानकारी कंपनी को भेजी गई शिकायत और कंपनी की ओर से मिला जवाब शामिल हो सकता है। इससे शिकायत की पूरी स्थिति स्पष्ट करने और मामले को आगे बढ़ाने में आसानी होती है।
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हर शिकायत के लिए है तय रास्ता
बीमा कंपनी से जुड़ी समस्या होने पर सीधे हार मान लेना या केवल एजेंट से संपर्क करते रहना जरूरी नहीं है। इसके लिए एक निर्धारित शिकायत निवारण व्यवस्था मौजूद है। पहले बीमा कंपनी के GRO के पास शिकायत दर्ज करें और समाधान नहीं मिलने पर IRDAI के Bima Bharosa के जरिए मामला आगे बढ़ाएं। क्लेम रिजेक्ट होने, भुगतान में देरी या पॉलिसी से जुड़ी किसी गंभीर समस्या की स्थिति में पॉलिसीधारक को सभी दस्तावेज संभालकर रखना चाहिए और शिकायत की स्थिति पर लगातार नजर रखनी चाहिए। सही प्रक्रिया अपनाने से शिकायत को उचित मंच तक पहुंचाना आसान हो सकता है।
