August 22, 2026

PMI: अगस्त में प्राइवेट सेक्टर की ग्रोथ में मामूली सुधार, सर्विस सेक्टर ने संभाली रफ्तार; मैन्युफैक्चरिंग 5 साल के निचले स्तर पर

PMI

India’s Private Sector Growth Inches Up in August

भारत के प्राइवेट सेक्टर की कारोबारी गतिविधियों में अगस्त में मामूली सुधार देखने को मिला है। S&P Global की ओर से जारी HSBC Flash India Composite PMI के मुताबिक, अगस्त में प्राइवेट सेक्टर की ग्रोथ जुलाई के चार साल से ज्यादा समय के निचले स्तर से थोड़ी ऊपर आई। हालांकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कमजोर रफ्तार ने ओवरऑल ग्रोथ पर दबाव बनाए रखा। अगस्त में Composite PMI बढ़कर 54.6 हो गया, जबकि जुलाई में यह 54.3 पर था। हालांकि अगस्त का आंकड़ा मार्च 2022 के बाद दूसरा सबसे कमजोर स्तर रहा।

सर्विस सेक्टर ने संभाली प्राइवेट सेक्टर की ग्रोथ

अगस्त में प्राइवेट सेक्टर की गतिविधियों में सुधार की सबसे बड़ी वजह सर्विस सेक्टर रहा। Flash Services PMI जुलाई के 53.3 से बढ़कर अगस्त में 54.5 हो गया।

जुलाई में सर्विस सेक्टर की कारोबारी गतिविधियों और नए काम में 53 महीने की सबसे धीमी रफ्तार दर्ज हुई थी। अगस्त में इसमें मामूली सुधार आया और नए ऑर्डर तथा बिजनेस एक्टिविटी की ग्रोथ कुछ तेज हुई।

S&P Global के मुताबिक सर्विस सेक्टर में मांग में सुधार ने अगस्त में प्राइवेट सेक्टर की कुल ग्रोथ को सहारा दिया।

मैन्युफैक्चरिंग PMI 5 साल के निचले स्तर पर

दूसरी तरफ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की स्थिति कमजोर रही। Manufacturing PMI जुलाई के 53.5 से गिरकर अगस्त में 52.9 पर आ गया।

यह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ का करीब पांच साल में सबसे कमजोर स्तर है। उत्पादन और नए ऑर्डर, दोनों में अगस्त के दौरान रफ्तार कमजोर हुई।

S&P Global के मुताबिक बाजार की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों की कम मांग ने कंपनियों की ग्रोथ को प्रभावित किया।

अमेरिका समेत कई देशों से मिले नए ऑर्डर

भारत की कंपनियों को अगस्त में विदेशी बाजारों से भी अच्छे ऑर्डर मिले। प्राइवेट सेक्टर में एक्सपोर्ट ऑर्डर की ग्रोथ मजबूत रही हालांकि जुलाई की तुलना में इसकी रफ्तार कुछ कम हुई। सर्वे में शामिल कंपनियों ने अमेरिका, जर्मनी, चीन, सिंगापुर और जापान से नए ऑर्डर मिलने की जानकारी दी। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी बाजारों में मांग बनी हुई है।

रोजगार के मोर्चे पर अच्छी खबर

अगस्त के PMI आंकड़ों में रोजगार को लेकर भी सकारात्मक तस्वीर सामने आई। भारतीय प्राइवेट सेक्टर में नौकरी देने की रफ्तार तेज हुई और जून 2025 के बाद यह अप्रैल 2026 के साथ संयुक्त रूप से सबसे तेज रफ्तार रही। कंपनियों ने बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की जरूरत बताई।

हालांकि रोजगार में यह सुधार मुख्य रूप से सर्विस सेक्टर में देखने को मिला। दूसरी तरफ, मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या करीब ढाई साल में पहली बार कम हुई।

कंपनियों ने ग्राहकों पर बढ़ाया कीमतों का बोझ

अगस्त में कंपनियों की लागत और बिक्री कीमतों को लेकर भी अहम बदलाव देखने को मिला। कंपनियों की ओर से ग्राहकों से वसूली जाने वाली कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार अप्रैल के बाद सबसे तेज रही।

हालांकि इनपुट लागत में बढ़ोतरी की रफ्तार सात महीने में सबसे धीमी रही। कंपनियों ने बिजली, स्टील जैसे कच्चे माल, परिवहन और टेक्नोलॉजी से जुड़ी लागत बढ़ने की जानकारी दी। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस, दोनों सेक्टर में कंपनियों ने जुलाई की तुलना में अगस्त में अपनी बिक्री कीमतों में ज्यादा तेजी से बढ़ोतरी की।

आगे की ग्रोथ को लेकर कंपनियां ज्यादा उम्मीद में

अगले 12 महीनों को लेकर कंपनियों की उम्मीदों में भी अगस्त में मामूली सुधार हुआ। कंपनियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में बाजार की परिस्थितियां बेहतर हो सकती हैं और इससे कारोबारी गतिविधियों को सहारा मिलेगा। कुल मिलाकर अगस्त के PMI आंकड़े बताते हैं कि सर्विस सेक्टर ने प्राइवेट सेक्टर की ग्रोथ को संभाला है लेकिन मैन्युफैक्चरिंग की कमजोर रफ्तार चिंता का विषय बनी हुई है। रोजगार में तेजी और विदेशी ऑर्डर सकारात्मक पहलू हैं, जबकि प्रतिस्पर्धा और कमजोर मांग मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए चुनौती बनी हुई है।