Dixon Technologies – Vivo JV को मिल सकती है सरकारी मंजूरी, शेयर 3% तक उछला
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Dixon Technologies के शेयर मंगलवार को तेजी में रहे जब बाजार में यह खबर आई कि कंपनी और चीनी स्मार्टफोन ब्रांड Vivo के बीच प्रस्तावित जॉइंट वेंचर (JV) को जल्द ही सरकार की मंजूरी मिल सकती है। इस खबर के बाद निवेशकों की खरीदारी बढ़ गई और शेयर में करीब 3.24% तक की तेजी देखने को मिली। बाद में कुछ मुनाफावसूली के चलते यह करीब 1% की बढ़त के साथ ₹11,925 के आसपास कारोबार करता रहा।
JV को सरकार से जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद
सूत्रों के अनुसार Dixon Technologies – Vivo JV को पहले ही इंटर-मिनिस्टीरियल ग्रुप (IMG) से मंजूरी मिल चुकी है। अब केवल इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की अंतिम मंजूरी बाकी है। माना जा रहा है कि सरकार इस महीने ही इस लंबे समय से लंबित प्रस्ताव को हरी झंडी दे सकती है और जल्द ही औपचारिक अप्रूवल लेटर जारी हो सकता है।
JV का स्ट्रक्चर और हिस्सेदारी
Dixon Technologies और Vivo ने दिसंबर 2024 में इस साझेदारी पर समझौता किया था। प्रस्तावित जॉइंट वेंचर में Dixon की 51% हिस्सेदारी होगी जबकि Vivo के पास 49% हिस्सेदारी रहेगी। इसका मतलब है कि इस JV का नियंत्रण भारतीय कंपनी Dixon के पास रहेगा।
क्या होगा इस जॉइंट वेंचर का काम
इस JV का मुख्य फोकस स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाना होगा। Vivo के ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग (OEM) ऑर्डर्स का बड़ा हिस्सा इसी यूनिट के जरिए पूरा किया जाएगा। इसके अलावा यह यूनिट अन्य ब्रांड्स के लिए भी कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग का काम करेगी जिससे भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और मजबूत होगा।
नोएडा प्लांट भी हो सकता है शामिल
रिपोर्ट्स के मुताबिक Vivo का नोएडा स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी इस प्रस्तावित JV के तहत शामिल किया जा सकता है। इससे ऑपरेशनल प्रक्रिया आसान होगी और रेगुलेटरी रिस्क कम हो सकते हैं। साथ ही यह प्लांट घरेलू और अन्य ब्रांड्स के लिए उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा।
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भारत में दोनों कंपनियों की मजबूत मौजूदगी
भारत में Vivo पहले से ही एक बड़ा स्मार्टफोन ब्रांड है जिसने 2025 में लगभग 3.5 करोड़ स्मार्टफोन बेचे। वहीं Dixon Technologies ने इसी अवधि में करीब 3.2 करोड़ मोबाइल फोन का उत्पादन किया। FY26 में कंपनी का कुल रेवेन्यू ₹48,873 करोड़ रहा, जिसमें मोबाइल और EMS सेगमेंट का योगदान सबसे ज्यादा रहा।
