July 26, 2026

Crypto Exchange के लिए CBDT की नई गाइडलाइन जारी, Income Tax Act 2025 के तहत ट्रांजैक्शन रिपोर्टिंग के नियम हुए स्पष्ट

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Crypto और अन्य डिजिटल एसेट्स की बढ़ती लोकप्रियता के बीच केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने Income-tax Act, 2025 के तहत क्रिप्टो एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (Crypto-Asset Service Providers) के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसका उद्देश्य क्रिप्टो एक्सचेंज और अन्य डिजिटल एसेट प्लेटफॉर्म को टैक्स रिपोर्टिंग से जुड़े नियमों को स्पष्ट करना है। CBDT ने साफ किया है कि यह गाइडलाइन क्रिप्टो पर नया टैक्स लगाने के लिए नहीं, बल्कि पहले से लागू टैक्स कानूनों के तहत रिपोर्टिंग प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए जारी की गई है।

OECD के Crypto-Asset Reporting Framework को अपनाएगा भारत

नई गाइडलाइन के साथ भारत ने Organisation for Economic Co-operation and Development (OECD) के Crypto-Asset Reporting Framework (CARF) को भी लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। CARF एक ग्लोबल व्यवस्था है जिसके तहत भाग लेने वाले देशों के बीच क्रिप्टो एसेट्स से जुड़ी टैक्स जानकारी का स्वत: आदान-प्रदान किया जाएगा। इसका मकसद सीमा पार होने वाले क्रिप्टो लेनदेन में टैक्स चोरी को रोकना और पारदर्शिता बढ़ाना है। CBDT चेयरमैन रवि अग्रवाल ने कहा कि क्रिप्टो एसेट्स के तेजी से बढ़ते उपयोग ने टैक्स प्रशासन के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित रिपोर्टिंग व्यवस्था जरूरी हो गई है।

क्या होगा ‘क्रिप्टो एसेट’?

गाइडलाइन के अनुसार क्रिप्टो एसेट वह डिजिटल वैल्यू है जो क्रिप्टोग्राफी आधारित डिस्ट्रीब्यूटेड लेजर या इसी तरह की तकनीक का उपयोग करके सुरक्षित और सत्यापित की जाती है। इसमें केवल पारंपरिक क्रिप्टोकरेंसी ही नहीं, बल्कि कई अन्य डिजिटल टोकन भी शामिल हो सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से-

  • Cryptocurrency
  • Security Tokens
  • Non-Fungible Tokens (NFTs)

हालांकि CBDT ने स्पष्ट किया है कि सभी डिजिटल एसेट रिपोर्टिंग के दायरे में नहीं आएंगे।

किन एसेट्स पर लागू नहीं होंगे नियम?

नई गाइडलाइन के अनुसार कुछ डिजिटल एसेट्स को रिपोर्टिंग से बाहर रखा गया है। इनमें शामिल हैं-

  • Central Bank Digital Currency (CBDC)
  • निर्धारित Electronic Money Products

ऐसे क्रिप्टो एसेट जिन्हें निवेश या भुगतान के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता

क्रिप्टो एक्सचेंज की क्या होगी जिम्मेदारी?

CBDT के अनुसार सभी Reporting Crypto-Asset Service Providers (RCASP) को अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद रिपोर्ट योग्य ग्राहकों की पहचान करनी होगी। उन्हें निम्न जानकारी टैक्स विभाग को उपलब्ध करानी होगी-

  • ग्राहक की पहचान
  • टैक्स रेजिडेंसी
  • क्रिप्टो ट्रांजैक्शन का विवरण
  • रिपोर्ट योग्य व्यक्तियों और संस्थाओं की जानकारी

इसके लिए एक्सचेंजों को Income-tax Rules में तय Due Diligence प्रक्रिया का पालन करना होगा।

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विदेशी टैक्स रेजिडेंट पर भी रहेगी नजर

नई व्यवस्था के तहत उन ग्राहकों की जानकारी भी साझा करनी होगी जो भारत के बाहर किसी अन्य देश के टैक्स रेजिडेंट हैं। इसके अलावा ऐसी संस्थाओं के नियंत्रक (Controlling Persons) भी रिपोर्टिंग के दायरे में आएंगे जो निर्धारित छूट की श्रेणी में नहीं आते।

50,000 डॉलर से अधिक के भुगतान पर विशेष रिपोर्टिंग

CBDT ने “Reportable Retail Payment Transaction” की भी परिभाषा तय की है। यदि कोई व्यक्ति 50,000 अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य के क्रिप्टो एसेट्स का उपयोग किसी वस्तु या सेवा के भुगतान में करता है, तो ऐसे लेनदेन की रिपोर्ट भी संबंधित क्रिप्टो सर्विस प्रोवाइडर को टैक्स विभाग के पास भेजनी होगी।

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टैक्स पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

CBDT का कहना है कि यह गाइडलाइन क्रिप्टो उद्योग के लिए रिपोर्टिंग प्रक्रिया को सरल बनाएगी और अंतरराष्ट्रीय टैक्स पारदर्शिता के मानकों के अनुरूप भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करेगी। साथ ही इससे सीमा पार होने वाले क्रिप्टो लेनदेन की निगरानी आसान होगी और टैक्स चोरी पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।