Gold Investment फिर आसान, HDFC- Axis समेत 4 Mutual Funds ने हटाई पाबंदी; Gold ETF में दोबारा निवेश शुरू
Gold ETF
Gold ETF : गोल्ड में म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश करने वाले लोगों के लिए राहत की खबर है। HDFC Mutual Fund, Axis Mutual Fund, Tata Mutual Fund और Aditya Birla Sun Life Mutual Fund ने अपनी चुनिंदा गोल्ड-बेस्ड स्कीम्स में लगी अस्थायी निवेश पाबंदियां हटा दी हैं। इसके बाद इन फंड हाउस की Gold ETF, Gold Fund और Gold ETF Fund of Fund स्कीम्स में दोबारा निवेश किया जा सकता है। इन फंड हाउस ने जून 2026 में गोल्ड से जुड़ी स्कीम्स में आने वाले भारी निवेश के बीच कुछ ट्रांजैक्शन पर सीमाएं लगाई थीं। अब बाजार की स्थिति सामान्य होने और निवेश प्रबंधन से जुड़ी दिक्कतें कम होने के बाद धीरे-धीरे इन प्रतिबंधों को हटाया गया है।
HDFC Mutual Fund ने खोली Gold ETF FoF में निवेश की राह
HDFC Mutual Fund ने अपने नोटिस-कम-एडेंडम के जरिए बताया कि HDFC Gold ETF Fund of Fund में लंपसम सब्सक्रिप्शन और स्विच-इन पर लगाई गई अस्थायी रोक हटा दी गई है। यह बदलाव 14 अगस्त 2026 से प्रभावी है। अब इस स्कीम में लंपसम निवेश और स्विच-इन सामान्य तरीके से किया जा सकता है। यानी निवेशकों को पहले लागू की गई अस्थायी सीमा के कारण अब अलग से रुकावट का सामना नहीं करना होगा।
Axis Mutual Fund ने भी हटाई लिमिट
Axis Mutual Fund ने अपने Gold ETF और Gold Fund में भी कई प्रतिबंध हटा दिए हैं।
Axis Gold ETF में 25 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करने वाले बड़े निवेशकों के लिए Direct Transactions 18 अगस्त 2026 से फिर से स्वीकार किए जा रहे हैं। इसी तारीख से Axis Gold Fund में लंपसम सब्सक्रिप्शन और स्विच-इन पर लगी सीमा भी हटा दी गई है। फंड हाउस ने कहा है कि Scheme Information Document यानी SID और Key Information Memorandum यानी KIM की बाकी शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
Tata Mutual Fund ने भी निवेश दोबारा शुरू किया
Tata Mutual Fund ने 21 अगस्त 2026 से बड़े निवेशकों के लिए Tata Gold ETF में सब्सक्रिप्शन फिर से खोल दिया है। 25 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा निवेश करने वाले निवेशक इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके साथ ही Tata Gold ETF FoF में लंपसम निवेश और स्विच-इन पर लगी सीमा भी हटा दी गई है। यह बदलाव अगली सूचना तक जारी रहेगा।
Aditya Birla Sun Life ने सबसे पहले हटाई रोक
Aditya Birla Sun Life Mutual Fund ने इन फंड हाउस में सबसे पहले अपनी गोल्ड स्कीम पर लगी रोक हटाई थी। 13 अगस्त 2026 से Aditya Birla Sun Life Gold Fund में नए लंपसम सब्सक्रिप्शन और स्विच-इन को बिना किसी अस्थायी सीमा के दोबारा स्वीकार किया जाने लगा। इस तरह अब चार बड़े फंड हाउस ने अपनी गोल्ड-आधारित स्कीम्स में निवेश की सुविधाएं फिर से बहाल कर दी हैं।
जून में लगाई गई थी पाबंदी
गोल्ड स्कीम्स पर लगी इन अस्थायी सीमाओं की शुरुआत जून 2026 में हुई थी। उस समय Gold ETF और Gold Fund में निवेश को लेकर अचानक तेजी देखने को मिली थी। HDFC Mutual Fund ने 4 जून, Axis Mutual Fund ने 5 और 10 जून, जबकि Tata Mutual Fund ने 8 जून से अपनी कुछ गोल्ड स्कीम्स में निवेश पर सीमाएं लागू की थीं। मुख्य वजह गोल्ड की बढ़ती मांग और फिजिकल गोल्ड की उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियां बताई गई थीं। गोल्ड ETF को अपनी यूनिट्स के पीछे संबंधित मात्रा में फिजिकल गोल्ड रखना होता है। ऐसे में जब निवेशकों की मांग अचानक बढ़ी, तब फंड हाउस के लिए पर्याप्त फिजिकल गोल्ड की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण हो गया।
Gold ETF की मांग बढ़ी
फिजिकल गोल्ड पर इम्पोर्ट ड्यूटी में बदलाव और बाजार में सोने की कीमतों को लेकर मजबूत रुझान के बीच Gold ETF जैसे प्रोडक्ट्स में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी थी। इससे फंड हाउस पर नई ETF यूनिट्स के लिए जरूरी फिजिकल गोल्ड जुटाने का दबाव बढ़ गया। सप्लाई चेन की सीमाओं को देखते हुए कुछ फंड हाउस ने बड़े निवेश और लंपसम खरीदारी पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिए थे। इन उपायों का उद्देश्य निवेश को पूरी तरह बंद करना नहीं, बल्कि अचानक बढ़ी मांग को व्यवस्थित तरीके से संभालना था।
अब निवेशकों के लिए क्या बदला?
अब HDFC, Axis, Tata और Aditya Birla Sun Life की संबंधित गोल्ड स्कीम्स में निवेश का रास्ता काफी हद तक सामान्य हो गया है। इसका मतलब यह है कि जिन निवेशकों को पहले लंपसम निवेश या बड़े ट्रांजैक्शन पर सीमा का सामना करना पड़ रहा था, उन्हें अब अधिक आसानी हो सकती है। हालांकि हर स्कीम के लिए लागू नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए निवेश करने से पहले संबंधित फंड हाउस की ताजा सूचना, Scheme Information Document और लागू शुल्क व शर्तों की जांच करना जरूरी है। गोल्ड ETF या Gold Fund में निवेश करने का फैसला सिर्फ इसलिए नहीं करना चाहिए कि अस्थायी पाबंदी हट गई है। सोने की कीमत, निवेश का समय, जोखिम, पोर्टफोलियो में गोल्ड की जरूरत और निवेश अवधि को ध्यान में रखकर फैसला लेना बेहतर होता है।
