विदेशी निवेशकों के लिए LTCG टैक्स खत्म करने की SEBI की सिफारिश, म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी मिल सकती है राहत
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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शेयर बाजार में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने और घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों को राहत देने के लिए दो अहम टैक्स बदलावों की सिफारिश की है। नियामक ने विदेशी निवेशकों के इक्विटी निवेश पर लगने वाला लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स खत्म करने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा एक साल से अधिक समय तक निवेश बनाए रखने के बाद एक म्यूचुअल फंड स्कीम से दूसरी स्कीम में पैसा ट्रांसफर करने पर भी LTCG टैक्स से छूट देने की सिफारिश की गई है।
रॉयटर्स की 2 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, SEBI ने ये सुझाव फरवरी 2027 में पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले सरकार को भेजे गए अपने प्री-बजट प्रस्तावों में शामिल किए हैं। हालांकि ये सिफारिशें बाध्यकारी नहीं हैं। इन पर अंतिम फैसला वित्त मंत्रालय और केंद्र सरकार को लेना है।
SEBI का विदेशी निवेशकों के लिए LTCG टैक्स खत्म करने का प्रस्ताव
फिलहाल भारत में पात्र इक्विटी निवेश को 12 महीने से अधिक समय तक रखने के बाद बेचने पर विदेशी निवेशकों को 12.5 फीसदी LTCG टैक्स देना पड़ता है। वहीं, 12 महीने या उससे कम समय तक रखे गए इक्विटी निवेश पर होने वाले शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) पर 20 फीसदी टैक्स लगता है। इसके अलावा शेयरों की खरीद-बिक्री पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और डिविडेंड पर लागू विदहोल्डिंग टैक्स भी देना होता है।
SEBI का मानना है कि LTCG टैक्स हटाने से विदेशी निवेशकों पर टैक्स का बोझ कम होगा और भारतीय शेयर बाजार में निवेश करना उनके लिए अधिक आकर्षक बन सकता है।
2026 में भारतीय शेयरों से 31 अरब डॉलर निकाल चुके विदेशी निवेशक
SEBI की यह सिफारिश ऐसे समय आई है, जब विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने 2026 में अब तक भारतीय शेयरों से रिकॉर्ड 31 अरब डॉलर की निकासी की है। पिछले दो वर्षों में भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन भी कई उभरते बाजारों की तुलना में कमजोर रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार SEBI ने पिछले दो वर्षों में विदेशी निवेशकों के साथ कई बैठकें की हैं। इन चर्चाओं में टैक्स व्यवस्था एक प्रमुख चिंता के रूप में सामने आई। नियामक ने यह भी माना है कि भारतीय शेयर बाजार में निवेश से जुड़ी ट्रांजैक्शन लागत कई अन्य देशों की तुलना में अधिक है।
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Mutual Fund स्कीम बदलने पर भी टैक्स छूट का प्रस्ताव
SEBI ने घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी राहत देने की सिफारिश की है। इसके तहत यदि कोई निवेशक एक साल से अधिक समय तक किसी म्यूचुअल फंड स्कीम में निवेश बनाए रखने के बाद अपना पैसा दूसरी स्कीम में ट्रांसफर करता है, तो उसे इस बदलाव पर तत्काल LTCG टैक्स से छूट मिल सकती है।
फिलहाल एक म्यूचुअल फंड स्कीम से दूसरी में स्विच करने को पहली स्कीम से पैसा निकालने यानी रिडेम्पशन और दूसरी स्कीम में नया निवेश करने के तौर पर देखा जाता है। इस प्रक्रिया में होने वाला पात्र कैपिटल गेन टैक्स के दायरे में आता है। यानी निवेशक बाजार से पैसा बाहर निकाले बिना केवल अपनी निवेश रणनीति बदलना चाहता है, तब भी उसे टैक्स देना पड़ सकता है।
अगर SEBI का प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है, तो एक साल से अधिक पुराने पात्र निवेश को दूसरी स्कीम में स्विच करने पर तत्काल LTCG टैक्स की देनदारी नहीं बनेगी। इससे निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करने और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार निवेश को दोबारा व्यवस्थित करने में आसानी हो सकती है।
₹82.6 लाख करोड़ का है म्यूचुअल फंड उद्योग
भारत में म्यूचुअल फंड उद्योग का आकार तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक देश के म्यूचुअल फंड उद्योग के पास करीब 82.6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति प्रबंधन के तहत (AUM) है। वहीं हर महीने आने वाले निवेश के माध्यम से औसतन 3,000 करोड़ रुपये जुटाए जा रहे हैं।
ऐसे में म्यूचुअल फंड स्कीम बदलने पर टैक्स राहत मिलने से उन निवेशकों को फायदा हो सकता है, जो लंबे समय तक निवेश बनाए रखते हुए अपने पोर्टफोलियो में बदलाव करना चाहते हैं।
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SEBI के दोनों प्रस्ताव फिलहाल सरकार के विचाराधीन हैं। विदेशी निवेशकों के LTCG टैक्स को खत्म करने और म्यूचुअल फंड स्कीम स्विच करने पर टैक्स छूट देने का फैसला वित्त मंत्रालय को लेना है।
