RBI की Forex Swap योजना में 143.6 अरब डॉलर की भारी रकम आई, रुपये को सहारा देने की कोशिश
RBI Forex Swap
RBI की ओर से विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए शुरू की गई रियायती स्वैप सुविधा को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। 18 सितंबर 2026 तक इस सुविधा के जरिए भारत में 143.6 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा आई है। RBI ने रुपये पर दबाव और विदेशी मुद्रा बाजार में तरलता की स्थिति को संभालने के लिए कई उपाय किए थे जिनमें यह स्वैप सुविधा भी शामिल थी।
RBI ने जून में विदेशी मुद्रा से जुड़े कई उपायों की घोषणा की थी। इनमें विदेशों से विदेशी मुद्रा जुटाने वाले बैंकों और संस्थानों के लिए हेजिंग की लागत कम करने और विदेशी मुद्रा को रुपये में बदलने के लिए स्वैप व्यवस्था को आसान बनाने जैसे कदम शामिल थे। इनका उद्देश्य देश में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाना और रुपये में तेज उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद करना था।

NRI जमा से आया सबसे बड़ा हिस्सा
इस योजना के तहत विदेशी मुद्रा जुटाने में विदेशों में रहने वाले भारतीयों की एफसीएनआर-बी जमा की सबसे बड़ी भूमिका रही। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 31 अगस्त तक एफसीएनआर-बी जमा के जरिए करीब 132.98 अरब डॉलर की राशि आई थी।
विदेशी मुद्रा जमा में तेज बढ़ोतरी को देखते हुए आरबीआई ने इस विशेष जमा सुविधा को तय समय से पहले बंद कर दिया था। इससे पता चलता है कि आरबीआई की ओर से दिए गए प्रोत्साहनों के बाद विदेशों में रहने वाले भारतीयों से डॉलर जुटाने की प्रक्रिया में तेजी आई।
विदेशी उधारी से भी आया पैसा
विदेशों से जुटाई गई अन्य विदेशी मुद्रा में विदेशी मुद्रा में लिए गए उधार से 5.32 अरब डॉलर और बाहरी वाणिज्यिक उधारी से 5.30 अरब डॉलर शामिल रहे।
आरबीआई के मुताबिक बाहरी वाणिज्यिक उधारी और विदेशी मुद्रा में लिए गए उधार से जुटाई गई राशि 31 दिसंबर 2026 तक स्वैप सुविधा के लिए पात्र रहेगी।
रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार को मिला सहारा
आरबीआई की इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य देश में विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ाना और रुपये पर दबाव को कम करना है। अगस्त के अंत तक विशेष योजनाओं के जरिए 136 अरब डॉलर से ज्यादा विदेशी मुद्रा जुटाई जा चुकी थी। इसके बाद 28 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर रिकॉर्ड 740.80 अरब डॉलर पर पहुंच गया था
विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी से आरबीआई को जरूरत पड़ने पर मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए बड़ा बफर मिलता है। हाल के महीनों में केंद्रीय बैंक रुपये में तेज गिरावट को रोकने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय रहा है।
2013 में भी अपनाया था ऐसा तरीका
विदेशी मुद्रा पर दबाव के दौरान भारत पहले भी विदेशों में रहने वाले भारतीयों से डॉलर जुटाने का तरीका अपना चुका है। वर्ष 2013 में आरबीआई ने इसी तरह के प्रोत्साहन देकर विदेशी मुद्रा जमा और विदेशी उधारी बढ़ाने की कोशिश की थी। उस समय इस पहल से करीब 26 अरब डॉलर जुटाए गए थे।
इस बार जुटाई गई राशि 2013 के मुकाबले काफी अधिक है। यह ऐसे समय में हुआ है जब ग्लोबल स्तर पर ब्याज दरों, कच्चे तेल की कीमतों और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के कारण उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बना हुआ है।
RBI की नजर विदेशी मुद्रा बाजार पर
RBI लगातार विदेशी मुद्रा बाजार की स्थिति और देश में उपलब्ध डॉलर की मात्रा पर नजर रख रहा है। हाल में केंद्रीय बैंक ने बैंकों को विदेशों में रहने वाले भारतीयों से जुटाए गए डॉलर को आरबीआई के साथ स्वैप करने के लिए अतिरिक्त सुविधा भी दी थी। इसका मकसद अचानक बढ़ी डॉलर की आवक को संभालना और विदेशी मुद्रा बाजार में अत्यधिक दबाव को कम करना था।
आरबीआई की इन पहलों से विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिली है। हालांकि, रुपये की दिशा पर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी ब्याज दरों, विदेशी निवेश और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों जैसे कई कारकों का असर बना हुआ है। इसलिए केंद्रीय बैंक आने वाले समय में भी विदेशी मुद्रा बाजार में तरलता और रुपये की स्थिति पर नजर रखेगा।
