June 20, 2026

SEBI के नए फैसलों से निवेशकों को राहत: शेयर ट्रांसफर होगा आसान, बायबैक और म्यूचुअल फंड नियमों में भी बदलाव

Sebi

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पूंजी बाजार नियामक SEBI ने निवेशकों और उनके परिवारों के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। बोर्ड की हालिया बैठक में मृतक निवेशकों के शेयर और अन्य सिक्योरिटीज को कानूनी वारिसों के नाम ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा आसान बनाने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही शेयर बायबैक, म्यूचुअल फंड संचालन और आंतरिक पारदर्शिता से जुड़े कई प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। SEBI का कहना है कि इन बदलावों का मकसद निवेशकों को कम दस्तावेजी झंझट के साथ तेज और सरल सेवाएं उपलब्ध कराना है।

उत्तराधिकारियों को मिलेगा बड़ा फायदा

अक्सर किसी निवेशक की मृत्यु के बाद उसके शेयर और बॉन्ड वारिसों के नाम ट्रांसफर कराने में लंबी प्रक्रिया और कई दस्तावेजों की जरूरत पड़ती थी। अब SEBI ने इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत छोटे दावों वाले मामलों में उत्तराधिकारियों को कम औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी, जिससे शेयर ट्रांसफर की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज हो सकेगी।

छोटे दावों की सीमा बढ़ाई गई

SEBI ने स्मॉल वैल्यू क्लेम की सीमा में बड़ा इजाफा किया है। फिजिकल फॉर्म में मौजूद सिक्योरिटीज के लिए यह सीमा 10 लाख रुपये तक और डीमैट होल्डिंग्स के लिए 30 लाख रुपये तक कर दी गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हजारों परिवारों को राहत मिलेगी जिन्हें पहले छोटे निवेशों के ट्रांसफर के लिए भी लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था।

पैन और वसीयत से जुड़ी प्रक्रिया हुई आसान

नियामक ने यह भी स्पष्ट किया है कि ट्रांसमिशन के दौरान अलग से पैन कार्ड जमा करने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि डीमैट खाता खोलते समय पैन पहले ही सत्यापित किया जा चुका होता है। इसके अलावा वसीयत के प्रोबेट से जुड़ी अनिवार्य प्रक्रिया में भी राहत दी गई है। इससे कई मामलों में कानूनी प्रक्रिया का बोझ कम होने की उम्मीद है।

अब एक ही दस्तावेज से होगा काम

SEBI ने अलग-अलग एफिडेविट और एनओसी जमा करने की व्यवस्था को भी सरल बना दिया है। अब कई दस्तावेजों की जगह एक संयुक्त एफिडेविट-कम-एनओसी स्वीकार किया जाएगा। साथ ही QR कोड वाले डेथ सर्टिफिकेट को भी वैध दस्तावेज के रूप में मान्यता दी गई है, जिससे सत्यापन प्रक्रिया और तेज हो सकेगी।

ओपन मार्केट बायबैक की वापसी

बोर्ड बैठक में एक और अहम फैसला लेते हुए SEBI ने स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से ओपन मार्केट शेयर बायबैक को फिर से अनुमति देने का फैसला किया है। पिछले कुछ वर्षों में टैक्स व्यवस्था में हुए बदलावों के बाद इस व्यवस्था की समीक्षा की गई थी। अब इसे फिर से शुरू करने का उद्देश्य कंपनियों को अधिक लचीलापन देना और निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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म्यूचुअल फंड उद्योग को भी राहत

SEBI ने म्यूचुअल फंड कंपनियों को अस्थायी नकदी जरूरतों से निपटने के लिए इंट्रा-डे बॉरोइंग की सुविधा को आसान बनाने की मंजूरी दी है। इस कदम से फंड हाउसेज को अल्पकालिक लिक्विडिटी प्रबंधन में मदद मिलेगी और निवेशकों के हितों की सुरक्षा भी मजबूत होगी।

कर्मचारियों के लिए नए नियम लागू

बोर्ड ने संस्था के भीतर जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से कर्मचारियों और बोर्ड सदस्यों के लिए नए आचार संहिता नियमों को भी मंजूरी दी है। इसके तहत SEBI के कर्मचारी सेवा नियमों में संशोधन किए जाएंगे ताकि नियामक संस्था की कार्यप्रणाली और अधिक पारदर्शी बन सके।

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सेल्फ-लिस्टिंग पर फिलहाल नहीं होगा कोई बदलाव

SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने स्पष्ट किया कि फिलहाल स्टॉक एक्सचेंजों को अपने ही प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध होने की अनुमति देने पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में नियामक का फोकस निवेशक सुरक्षा, बाजार की पारदर्शिता और नियामकीय ढांचे को मजबूत करने पर है।