Tata Electronics : कंपनी का बड़ा डेटा लीक, एपल-टेस्ला के गोपनीय दस्तावेज डार्क वेब पर पहुंचे
Tata Electronics
टाटा ग्रुप की कंपनी Tata Electronics एक बड़े साइबर हमले का शिकार हो गई है। इस हमले में हैकर्स ने कंपनी के 2 लाख से ज्यादा गोपनीय दस्तावेज और फाइलें चुराकर डार्क वेब पर लीक कर दी हैं। लीक हुए डेटा में कंपनी के प्रमुख ग्राहकों एपल और टेस्ला से जुड़े संवेदनशील डिजाइन, तकनीकी दस्तावेज और कारोबारी जानकारी भी शामिल बताई जा रही है। हालांकि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने स्पष्ट किया है कि इस घटना का उसके मौजूदा बिजनेस ऑपरेशन्स पर कोई असर नहीं पड़ा है और कंपनी की सभी सेवाएं सामान्य रूप से जारी हैं।
एपल और टेस्ला के गोपनीय दस्तावेज हुए लीक
रिपोर्ट्स के अनुसार डार्क वेब पर अपलोड किए गए डेटा में एपल और टेस्ला से जुड़े कई संवेदनशील दस्तावेज मौजूद हैं। एपल से जुड़ी फाइलों में आईफोन कंपोनेंट्स, मटेरियल स्पेसिफिकेशन और क्वालिटी इंस्पेक्शन से संबंधित दस्तावेज शामिल हैं। एक 52 पन्नों का तकनीकी दस्तावेज भी सामने आया है, जिसमें आईफोन सर्किट बोर्ड के क्वालिटी स्टैंडर्ड्स की जानकारी बताई जा रही है। वहीं टेस्ला से जुड़े दस्तावेजों में चार्जिंग सिस्टम और नई पीढ़ी के वाहनों के कुछ तकनीकी विवरण शामिल होने की बात कही जा रही है। कुछ फाइलों पर “Trade Secret” जैसी चेतावनियां भी दर्ज मिली हैं।
630 GB डेटा चोरी होने का दावा
साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों के मुताबिक ‘World Leaks’ नाम के रैनसमवेयर ग्रुप ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। हैकर्स का दावा है कि उन्होंने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सिस्टम से करीब 630 GB डेटा हासिल किया है, जिसमें 2 लाख से अधिक फाइलें और फोल्डर्स शामिल हैं। यही डेटा बाद में डार्क वेब पर प्रकाशित किया गया। बताया जा रहा है कि इसी समूह ने इससे पहले वैश्विक कंपनियों को भी निशाना बनाया था।
कर्मचारियों की निजी जानकारी भी लीक
डेटा लीक में केवल तकनीकी दस्तावेज ही नहीं बल्कि कर्मचारियों की व्यक्तिगत जानकारी भी शामिल होने की बात सामने आई है। साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर्स के अनुसार लीक डेटा में कई वर्षों के ईमेल रिकॉर्ड, इवेंट लॉग्स और कुछ कर्मचारियों के पासपोर्ट की प्रतियां भी मौजूद हैं। इनमें विदेशी नागरिक कर्मचारियों की जानकारी भी शामिल बताई जा रही है।
एपल ने शुरू की स्वतंत्र जांच
घटना के सामने आने के बाद एपल की ग्लोबल साइबर सिक्योरिटी टीम ने मामले की जांच शुरू कर दी है। कंपनी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि डेटा लीक की मुख्य वजह क्या रही और इसका दायरा कितना बड़ा है। हालांकि एपल ने फिलहाल कहा है कि इस घटना से उसके कारोबारी संचालन पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ा है।
टाटा को फिरौती मांगने का संदेश मिलने की चर्चा
मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार साइबर हमले के बाद टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स को फिरौती से जुड़े कॉल या संदेश भी मिले हैं। हालांकि कंपनी ने इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। वहीं भारत सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने भी फिलहाल सार्वजनिक रूप से कोई बयान जारी नहीं किया है।
Tata Electronics का होसुर प्लांट से जुड़ी फाइलें भी सामने आईं
लीक डेटा में तमिलनाडु के होसुर स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के आईफोन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से संबंधित कई दस्तावेज और फाइलें भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि टाटा ने पिछले सप्ताह अपने कुछ कर्मचारियों को इस डेटा ब्रीच की जानकारी दे दी थी। होसुर प्लांट भारत में एपल के लिए आईफोन निर्माण का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
भारत में एपल की सप्लाई चेन को झटका
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स वर्तमान में भारत में बनने वाले कुल आईफोन्स का लगभग एक-तिहाई हिस्सा तैयार करती है। शेष उत्पादन फॉक्सकॉन द्वारा किया जाता है। ऐसे में यह डेटा लीक भारत में एपल की सप्लाई चेन के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में साइबर सुरक्षा को लेकर निगरानी और कड़ी हो सकती है।
पहले भी साइबर हमले का सामना कर चुका है टाटा ग्रुप
यह पहला मौका नहीं है जब टाटा ग्रुप की किसी कंपनी को साइबर हमले का सामना करना पड़ा हो। पिछले वर्ष टाटा समूह की ब्रिटिश लग्जरी वाहन कंपनी जगुआर लैंड रोवर (JLR) भी साइबर हमले का शिकार हुई थी, जिससे उसके उत्पादन पर कई सप्ताह तक असर पड़ा था। अब टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ा यह नया मामला देश के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए चिंता का विषय बन गया है।
