अगले हफ्ते शेयर बाजार की चाल तय करेंगे ये 5 बड़े फैक्टर, India-US ट्रेड डील से लेकर US-Iran तनाव तक पर रहेगी नजर
Share Market
भारतीय शेयर बाजार ने छुट्टियों वाले छोटे कारोबारी सप्ताह का समापन बढ़त के साथ किया। चार कारोबारी सत्रों में से तीन में बाजार हरे निशान में बंद हुआ। इस दौरान निफ्टी 24,000 के अहम स्तर के ऊपर टिकने में सफल रहा, जबकि सेंसेक्स ने भी अच्छी मजबूती दिखाई। साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 0.39% की बढ़त के साथ 77,100.47 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 0.18% चढ़कर 24,056 अंक पर पहुंच गया।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को मिला सहारा
बीते सप्ताह शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ी राहत कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट रही। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से तेल टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने से ब्रेंट क्रूड की कीमतें फिर से पहले के स्तर के करीब पहुंच गईं। इससे भारत में आयातित महंगाई, चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) और कंपनियों की लागत बढ़ने जैसी चिंताओं में कमी आई, जिसका सकारात्मक असर शेयर बाजार पर देखने को मिला।
India-US ट्रेड डील पर बाजार की नजर
निवेशकों की नजर भारत और अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड डील पर भी बनी हुई है। अगर दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक प्रगति होती है तो इसका असर बाजार के सेंटीमेंट पर भी देखने को मिल सकता है। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की चुनिंदा खरीदारी ने भी बाजार को मजबूती देने का काम किया है।
US-Iran तनाव और कच्चे तेल की कीमतें रहेंगी अहम
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताह में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर निवेशकों की सबसे ज्यादा नजर रहेगी। यदि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी आ सकती है, जिससे वैश्विक शेयर बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी दबाव देखने को मिल सकता है। वहीं हालात सामान्य रहने या बातचीत आगे बढ़ने की स्थिति में निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है।
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अमेरिकी महंगाई और ब्याज दरों पर रहेगा फोकस
हाल ही में अमेरिका में महंगाई दर तीन साल में पहली बार 4% के ऊपर पहुंची है। इससे उम्मीद बढ़ गई है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है। ऐसी स्थिति में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
मानसून की रफ्तार भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण
घरेलू स्तर पर निवेशकों की नजर दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति पर रहेगी। कई कृषि क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने के कारण फसल उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ी है। अगर बारिश में लंबे समय तक कमी बनी रहती है तो खाद्य महंगाई बढ़ सकती है और ग्रामीण मांग पर भी असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव बाजार की धारणा और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
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अगले सप्ताह बाजार पर असर डालने वाले 5 बड़े फैक्टर
- भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जुड़ी प्रगति
- अमेरिका-ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव
- कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
- अमेरिकी महंगाई और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति
- भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्थिति
इन सभी घटनाक्रमों के आधार पर अगले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय होने की संभावना है।
