Coal India FY30 तक R&D पर करेगी ₹1,900 करोड़ का निवेश, स्वच्छ ऊर्जा और नई माइनिंग टेक्नोलॉजी पर रहेगा फोकस
Coal India
सरकारी कोयला कंपनी Coal India Limited (CIL) ने वित्त वर्ष 2030 तक रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर करीब ₹1,900 करोड़ निवेश करने की योजना बनाई है। कंपनी का लक्ष्य माइनिंग सेक्टर में नई तकनीकों को बढ़ावा देना, उत्पादन क्षमता बढ़ाना और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ी तकनीकों का विकास करना है। कंपनी ने इसकी जानकारी शेयर बाजार को दी गई फाइलिंग में दी।
R&D पर बढ़ा फोकस, NaCCER बना बड़ा केंद्र
Coal India ने बताया कि FY25 में National Centre for Coal and Energy Research (NaCCER) की स्थापना के बाद कंपनी के रिसर्च कार्यक्रमों को नई गति मिली है। यह केंद्र हब-एंड-स्पोक मॉडल पर काम करेगा और Coal India की विभिन्न परियोजनाओं में तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देगा। कंपनी अब केवल शुरुआती रिसर्च तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि नई तकनीकों के प्रोटोटाइप तैयार करने और उन्हें व्यावहारिक स्तर पर लागू करने पर फोकस कर रही है।
Coal India का एक साल में चार गुना बढ़ा R&D खर्च
Coal India का R&D खर्च FY24 में ₹61 करोड़ था जो FY25 में बढ़कर ₹245 करोड़ हो गया। यानी कंपनी ने एक साल में रिसर्च पर खर्च लगभग चार गुना बढ़ा दिया है। कंपनी ने इनोवेशन को संस्थागत रूप देने के लिए नई R&D पॉलिसी भी लागू की है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए तय दिशा-निर्देशों के अनुसार कंपनियों को पिछले तीन वर्षों के औसत प्री-टैक्स मुनाफे का लगभग 1% रिसर्च एवं डेवलपमेंट पर खर्च करना होता है।
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IIT के साथ मिलकर विकसित होंगी नई तकनीकें
Coal India ने देश के प्रमुख IIT संस्थानों के साथ मिलकर तीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoEs) स्थापित किए हैं।
- IIT Hyderabad में Centre of Clean Coal Energy and Net Zero (CLEANZ)
- IIT Madras में Centre for Sustainable Energy (CSE)
- IIT (ISM) Dhanbad में Innovation in Mining (IMiN)
इन केंद्रों के लिए कंपनी ने कुल ₹253 करोड़ की फंडिंग मंजूर की है जिसे चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा।
कई अहम परियोजनाओं पर चल रहा काम
वर्तमान में NaCCER की निगरानी में 19 रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है जिनकी कुल लागत ₹225 करोड़ है। इसके अलावा IIT के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में 13 अन्य परियोजनाएं भी जारी हैं। इन परियोजनाओं के तहत कोल बेड मीथेन रिकवरी, कार्बन कैप्चर, कार्बन स्टोरेज (CCUS), दुर्लभ खनिजों की रिकवरी, हाई-ऐश कोयले का गैसीफिकेशन, सिंथेटिक गैस (Syngas) का उपयोग, सर्कुलर इकोनॉमी, पर्यावरण सुधार, एडवांस वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट और माइक्रो मॉड्यूलर न्यूक्लियर रिएक्टर जैसी तकनीकों पर शोध किया जा रहा है।
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विदेशी कंपनियों के साथ भी साझेदारी
Coal India ने नई तकनीकों के विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ भी सहयोग बढ़ाया है। कंपनी कनाडा की Ergo Exergy के साथ अंडरग्राउंड कोल गैसीफिकेशन, स्वीडन की Ericsson के साथ झांझरा अंडरग्राउंड माइन में 5G तकनीक लागू करने और ऑस्ट्रेलिया की CSIRO के साथ रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। कंपनी का मानना है कि इन निवेशों और साझेदारियों से भविष्य में कोयला उत्पादन अधिक सुरक्षित, आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकेगा।
