UPI पर लग सकता है MDR! हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर चार्ज की सिफारिश, छोटे दुकानदारों को राहत देने का प्रस्ताव
UPI MDR
भारत में UPI से पेमेंट करना अभी आमतौर पर यूजर्स के लिए फ्री है, लेकिन डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने के लिए बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR (Merchant Discount Rate) लागू करने की सिफारिश की गई है। संसद में पेश एक रिपोर्ट में वित्त मामलों की स्थायी समिति ने सरकार से इस दिशा में जल्द कदम उठाने को कहा है। समिति का कहना है कि UPI और दूसरे डिजिटल पेमेंट सिस्टम को चलाने की वास्तविक लागत और सरकार की ओर से मिलने वाले आर्थिक सहयोग के बीच बड़ा अंतर है। ऐसे में ज्यादा वैल्यू वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन से सीमित और तय MDR वसूलने की व्यवस्था बनाई जा सकती है।
सरकार पर बढ़ रहा है आर्थिक बोझ
भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली वित्त संबंधी स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जीरो-MDR ट्रांजैक्शन के लिए केंद्र सरकार ने करीब 2,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। वहीं, इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को संचालित करने की सालाना लागत करीब 20,700 करोड़ रुपए है। समिति ने कहा कि सरकार के आर्थिक सहयोग और डिजिटल पेमेंट सिस्टम की वास्तविक लागत के बीच इतना बड़ा अंतर लंबे समय में पूरे इकोसिस्टम की वित्तीय स्थिरता के लिए चुनौती बन सकता है।
हाई-वैल्यू पेमेंट पर MDR की सिफारिश
समिति ने एक टियर-बेस्ड रेवेन्यू मॉडल तैयार करने की सिफारिश की है। इसके तहत ज्यादा रकम वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर एक तय सीमा के अनुसार MDR लगाया जा सकता है। हालांकि समिति ने साफ किया है कि छोटे दुकानदारों और P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले ट्रांजैक्शन को इस व्यवस्था से सुरक्षित रखा जाना चाहिए। इसका मतलब है कि रोजमर्रा के छोटे UPI पेमेंट पर इसका असर सीमित रखने की कोशिश होगी।
UPI पर MDR का रास्ता खुला
यह सिफारिश ऐसे समय आई है जब संसद ने हाल ही में Payment and Settlement Systems Act, 2007 में संशोधन से जुड़ा विधेयक पारित किया है। संशोधन के जरिए उस कानूनी रोक को हटाने का रास्ता बनाया गया है, जिसके चलते बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर कुछ निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड पर MDR नहीं लगा सकते थे। हालांकि अभी सरकार ने UPI के लिए कोई निश्चित MDR दर, ट्रांजैक्शन लिमिट या मर्चेंट कैटेगरी घोषित नहीं की है। यानी फिलहाल यह तय नहीं है कि किस रकम से ऊपर के UPI पेमेंट पर कितना चार्ज लगाया जाएगा।
छोटे कारोबारियों और आम लोगों पर असर सीमित रखने की कोशिश
सरकार के सामने चुनौती यह है कि UPI को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाया जाए, लेकिन इसके साथ ही डिजिटल पेमेंट की लोकप्रियता और कम लागत वाली सुविधा पर असर न पड़े। समिति ने सुझाव दिया है कि ज्यादा वैल्यू वाले कारोबार से रेवेन्यू जुटाया जाए, जबकि छोटे व्यापारियों और व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान को जीरो-कॉस्ट व्यवस्था का फायदा मिलता रहे।
साइबर सिक्योरिटी और फ्रॉड रोकने के लिए जरूरी फंड
समिति ने डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में पर्याप्त रेवेन्यू नहीं होने पर चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक कम आमदनी का असर भविष्य में साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड प्रिवेंशन और पेमेंट नेटवर्क के इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाले निवेश पर पड़ सकता है। समिति का मानना है कि एक आत्मनिर्भर रेवेन्यू मॉडल बनने से बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और दूसरे डिजिटल पेमेंट संस्थानों को सरकारी सब्सिडी पर कम निर्भर रहना पड़ेगा।
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सरकार के MDR प्लान में क्या है?
वित्तीय सेवा विभाग UPI के लिए अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रहा है। इनमें कुछ हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन या खास मर्चेंट कैटेगरी पर MDR दोबारा लागू करना और अलग-अलग स्तर के ट्रांजैक्शन के हिसाब से इंसेंटिव स्ट्रक्चर तैयार करना शामिल है। इनकम टैक्स एक्ट की धारा 269SU के तहत 50 करोड़ रुपए से ज्यादा सालाना टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए कुछ निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सुविधाएं उपलब्ध कराना पहले से जरूरी है। इनमें RuPay डेबिट कार्ड और BHIM-UPI QR कोड जैसी सुविधाएं शामिल हैं। अब संसदीय समिति ने सरकार से टियर-बेस्ड MDR व्यवस्था को जल्द लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने को कहा है। अगर सरकार इस सिफारिश को लागू करती है तो हाई-वैल्यू मर्चेंट UPI पेमेंट पर भविष्य में चार्ज लग सकता है, जबकि छोटे दुकानदारों और P2P ट्रांजैक्शन को राहत देने का प्रयास रहेगा।
