DA Hike: 17 अगस्त को देशभर में प्रदर्शन करेगा BMS, ₹7,500 पेंशन से लेकर EPF लिमिट बढ़ाने तक की मांगें
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कर्मचारियों और श्रमिकों से जुड़े कई मुद्दों को लेकर भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने देशभर में प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। 17 अगस्त को BMS से जुड़े संगठन जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन, रैली और धरना देंगे। संगठन की प्रमुख मांगों में EPS-95 की न्यूनतम पेंशन ₹7,500 करने, वैरिएबल DA से जोड़ने, EPF की वेतन सीमा बढ़ाने और बोनस-ग्रेच्युटी के नियमों में बदलाव जैसी मांगें शामिल हैं। BMS ने 13 अगस्त को बताया कि जुलाई के अंत में रांची में हुई केंद्रीय कार्यकारिणी परिषद की बैठक में देशभर में आंदोलन का फैसला लिया गया। संगठन की 28 राज्य इकाइयों और 42 औद्योगिक महासंघों को प्रदर्शन आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और श्रम मंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपे जाएंगे।
₹7,500 न्यूनतम पेंशन की मांग
BMS की सबसे प्रमुख मांगों में EPS-95 के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 करना शामिल है। संगठन चाहता है कि इस पेंशन को वैरिएबल DA और आयुष्मान भारत योजना से भी जोड़ा जाए। फिलहाल EPS-95 के तहत न्यूनतम पेंशन ₹1,000 है। BMS का कहना है कि मौजूदा महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत को देखते हुए पेंशन में बड़ा बदलाव जरूरी है।
EPF की वेतन सीमा ₹30,000 करने की मांग
BMS ने EPF की मौजूदा ₹15,000 की वेतन सीमा को बढ़ाकर ₹30,000 करने की मांग की है। संगठन का मानना है कि इससे ज्यादा कर्मचारियों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा और भविष्य के लिए अधिक PF लाभ मिल सकेगा। इसके अलावा ESI की वेतन सीमा ₹21,000 से बढ़ाकर ₹42,000 करने की मांग भी रखी गई है।
बोनस और ग्रेच्युटी में बदलाव की मांग
BMS ने बोनस से जुड़े नियमों में भी बदलाव की मांग की है। संगठन चाहता है कि नए लेबर कोड के तहत बोनस की गणना पूरे वेतन या सैलरी के आधार पर हो। इसके साथ ही बोनस की गणना के लिए मौजूदा ₹7,000 की सीमा बढ़ाने की मांग की गई है। ग्रेच्युटी को लेकर संगठन का कहना है कि इसकी गणना 15 दिन के वेतन के बजाय 30 दिन के वेतन के आधार पर हो और इस पर कोई ऊपरी सीमा नहीं होनी चाहिए।
महंगाई के हिसाब से तय हो DA और न्यूनतम मजदूरी
BMS ने न्यूनतम मजदूरी को बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत से जोड़ने की मांग की है। संगठन चाहता है कि न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए फॉर्मूला आधारित व्यवस्था लागू की जाए, ताकि महंगाई बढ़ने के साथ मजदूरों की आय में भी बदलाव हो। स्कीम वर्कर्स के लिए अधिक मासिक मानदेय और सभी तरह के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के लिए समान काम के बदले समान वेतन की मांग भी आंदोलन में शामिल है।
वेतन कटौती और ठेका व्यवस्था पर भी सवाल
BMS ने ठेकेदारों और मैनपावर सप्लाई एजेंसियों पर वेतन से जुड़ी अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। संगठन के मुताबिक मजदूरों के वेतन से जुड़े मामलों में सख्ती जरूरी है। इसके अलावा सरकारी सेवाओं में खाली पदों को भरने, पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था लागू करने और जल्द इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस आयोजित करने की मांग भी की गई है।
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OPS बहाली की मांग भी शामिल
BMS ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग को भी अपनी सूची में रखा है। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार को व्यापक स्तर पर चर्चा करनी चाहिए।
नए लेबर कोड को लेकर BMS नाराज
BMS ने Industrial Relations Code और Occupational Safety, Health and Working Conditions Code का भी विरोध किया है। संगठन का आरोप है कि इन नए लेबर कोड में कई ऐसे प्रावधान हैं जो कर्मचारियों के हितों के खिलाफ हैं। संगठन ने स्कीम वर्कर्स की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। BMS का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकारें इन कर्मचारियों से लंबे समय से सेवाएं ले रही हैं, लेकिन उन्हें नियमित श्रमिक के तौर पर मान्यता नहीं दी गई है।
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आंगनवाड़ी और स्कीम वर्कर्स के लिए नीति की मांग
BMS ने विशेष रूप से आंगनवाड़ी समेत दूसरे स्कीम वर्कर्स का मुद्दा उठाया है। संगठन के मुताबिक देश में ऐसे कर्मचारियों की संख्या एक करोड़ से ज्यादा है। BMS के महासचिव सुरेंद्र कुमार पांडे ने कहा कि बदलते रोजगार के स्वरूप को देखते हुए देश को नई नीति की जरूरत है। उनका कहना है कि असंगठित क्षेत्र के इतने बड़े कार्यबल को ध्यान में रखते हुए भारत के लिए अलग और उपयुक्त नीति तैयार की जानी चाहिए। अब 17 अगस्त के देशव्यापी प्रदर्शन में BMS की इन मांगों को लेकर केंद्र सरकार पर कितना दबाव बनता है, इस पर कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों की नजर रहेगी।
