जून GST कलेक्शन में मजबूती, ₹1.94 लाख करोड़ जुटाए गए, सालाना आधार पर 14% की बढ़त
GST
सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जून 2026 में देश का GST कलेक्शन ₹1.94 लाख करोड़ रहा है। यह पिछले वर्ष जून 2025 में दर्ज ₹1.71 लाख करोड़ की तुलना में करीब 14% की वृद्धि को दर्शाता है। हालांकि यह आंकड़ा अप्रैल 2026 के ऐतिहासिक स्तर ₹2.42 लाख करोड़ से लगभग 20% कम है लेकिन इसके बावजूद यह कलेक्शन आर्थिक गतिविधियों में निरंतरता को दिखाता है।
आयात क्षेत्र से मिला मजबूत योगदान
इस महीने GST संग्रह में सबसे बड़ा योगदान आयात से जुड़ी गतिविधियों का रहा। आयातित वस्तुओं पर ग्रॉस GST रेवेन्यू में सालाना आधार पर 35% की बढ़त दर्ज हुई और यह बढ़कर ₹60,038 करोड़ तक पहुंच गया। इसके विपरीत घरेलू लेनदेन से प्राप्त ग्रॉस GST कलेक्शन में 6.5% की वृद्धि देखने को मिली और यह ₹1.34 लाख करोड़ रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि देश के भीतर खपत और व्यापारिक गतिविधियां लगातार सक्रिय बनी हुई हैं।
नेट कलेक्शन में भी सकारात्मक रुझान
नेट GST संग्रह की बात करें तो आयात से होने वाली कमाई में 42.2% की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह ₹45,370 करोड़ पर पहुंच गया। वहीं घरेलू नेट रेवेन्यू 2.6% की मामूली बढ़त के साथ ₹1.17 लाख करोड़ रहा। ग्रॉस और नेट कलेक्शन के बीच का अंतर रिफंड के कारण होता है जो उन मामलों में दिया जाता है जब कंपनियां अधिक टैक्स जमा कर देती हैं या निर्यात के चलते उन्हें वापसी का अधिकार मिलता है।
आर्थिक गतिविधियों का संकेतक है GST
GST कलेक्शन को अर्थव्यवस्था की स्थिति का एक अहम पैमाना माना जाता है। जब इसमें वृद्धि होती है तो इसका मतलब होता है कि बाजार में खरीद-बिक्री, उत्पादन और सेवाओं की मांग मजबूत है। इसके साथ ही यह भी संकेत मिलता है कि कर अनुपालन बेहतर हो रहा है और टैक्स प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ रही है।
GST सिस्टम की शुरुआत और संरचना
भारत में GST व्यवस्था 1 जुलाई 2017 से लागू की गई थी। इसने केंद्र और राज्य स्तर पर लागू कई पुराने करों को समाप्त कर दिया। इस व्यवस्था में कर को मुख्य रूप से चार हिस्सों में बांटा गया है। CGST केंद्र सरकार के लिए, SGST राज्य सरकार के लिए, IGST अंतरराज्यीय लेनदेन और आयात-निर्यात के लिए तथा सेस विशेष उद्देश्यों के लिए कुछ वस्तुओं पर लगाया जाता है।
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स्थिर अर्थव्यवस्था की ओर संकेत
जून का GST कलेक्शन यह दर्शाता है कि अर्थव्यवस्था स्थिर और संतुलित गति से आगे बढ़ रही है। आयात और घरेलू दोनों क्षेत्रों में वृद्धि यह संकेत देती है कि मांग बनी हुई है और व्यापारिक गतिविधियां सक्रिय हैं।
