August 1, 2026

RERA प्रोजेक्ट्स को मिली 4 महीने की राहत, लेकिन घर खरीदारों का इंतजार बढ़ेगा; पजेशन में हो सकती है देरी

Rera

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अगर आपने किसी अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट या मकान में निवेश किया है और पजेशन का इंतजार कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने RERA (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) के तहत पंजीकृत कई हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए चार महीने तक अतिरिक्त समय देने की सिफारिश की है। इससे जहां बिल्डर्स को निर्माण कार्य पूरा करने के लिए राहत मिलेगी, वहीं लाखों घर खरीदारों को अपने सपनों के घर की चाबी मिलने में देरी का सामना करना पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि ग्लोबल परिस्थितियों खासकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई चेन में आई रुकावटों के कारण निर्माण कार्य तय समय पर पूरा नहीं हो पा रहे हैं।

क्यों बढ़ाई गई RERA प्रोजेक्ट्स की समय-सीमा?

सरकार के अनुसार कई बाहरी कारणों से रियल एस्टेट सेक्टर प्रभावित हुआ है जिनमें प्रमुख हैं-

  • पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित होना।
  • निर्माण सामग्री की उपलब्धता में बाधा।
  • ट्रांसपोर्ट और माल ढुलाई की लागत में बढ़ोतरी।
  • सीमेंट, स्टील, एल्युमीनियम और अन्य निर्माण सामग्री की सप्लाई पर असर।

इन परिस्थितियों को असाधारण मानते हुए बिल्डर्स को राहत देने का फैसला।

किन प्रोजेक्ट्स को मिलेगा फायदा?

सरकार की सिफारिश के अनुसार यह राहत केवल उन RERA पंजीकृत प्रोजेक्ट्स को मिलेगी-

  • जिनकी मूल डेडलाइन 28 फरवरी 2026 या उसके बाद समाप्त हो रही है।
  • जिनकी पहले बढ़ाई गई समय-सीमा भी 28 फरवरी 2026 या उसके बाद खत्म हो रही है।
  • ऐसे पात्र प्रोजेक्ट्स को एकमुश्त चार महीने का अतिरिक्त समय दिया जा सकेगा।

क्या बिल्डर्स को अलग से आवेदन करना होगा?

इस बार केंद्र सरकार ने राज्य RERA प्राधिकरणों को सलाह दी है कि पात्र परियोजनाओं के लिए एक समान आदेश (Blanket Order) जारी किया जाए। यदि राज्य इस सिफारिश को लागू करते हैं, तो बिल्डर्स को अलग-अलग आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और प्रक्रिया पहले के मुकाबले आसान हो जाएगी।

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घर खरीदारों पर क्या पड़ेगा असर?

इस फैसले का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिन्होंने अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में घर बुक कराया है। जिससे

  • फ्लैट और मकान का पजेशन कुछ महीनों तक टल सकता है।
  • गृह प्रवेश की योजना प्रभावित हो सकती है।
  • किराए के मकान में रहने वालों को अतिरिक्त समय तक किराया देना पड़ सकता है।
  • होम लोन और अन्य वित्तीय योजनाओं का बजट भी प्रभावित हो सकता है।

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रियल एस्टेट सेक्टर के लिए क्या मायने हैं?

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव और सप्लाई चेन की समस्याएं लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो निर्माण लागत और बढ़ सकती है। इससे सीमेंट, स्टील, तांबा और एल्युमीनियम जैसी सामग्रियों की कीमतों में इजाफा होने की संभावना है जिसका असर आने वाले प्रोजेक्ट्स की लागत और डिलीवरी टाइमलाइन पर भी पड़ सकता है। हालांकि सरकार का मानना है कि अतिरिक्त समय मिलने से बिल्डर्स अधूरे प्रोजेक्ट्स को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेंगे और गुणवत्ता से समझौता नहीं करना पड़ेगा।