August 12, 2026

Vodafone Idea में 49% हिस्सेदारी के बावजूद रोजमर्रा के काम में दखल नहीं देगी सरकार, मंत्रालय ने साफ किया रुख

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Vodafone Idea (Vi) में भारत सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार कंपनी के रोजमर्रा के कामकाज में सीधे दखल देती है। संचार मंत्रालय ने संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। सरकार ने कहा है कि Vodafone Idea में हिस्सेदारी होने के बावजूद कंपनी का डेली मैनेजमेंट और कारोबारी फैसले उसके अपने प्रबंधन और कॉरपोरेट स्ट्रक्चर के तहत ही होते हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी हिस्सेदारी के कारण कॉरपोरेट गवर्नेंस के सामान्य नियमों से कोई अलग व्यवस्था नहीं बनी है।

सरकार कैसे बनी Vodafone Idea की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर?

Vodafone Idea पर टेलीकॉम से जुड़ी देनदारियों का बड़ा बोझ रहा है। इसी प्रक्रिया में कंपनी की कुछ देनदारियों को इक्विटी में बदला गया था। इसके बाद भारत सरकार Vodafone Idea की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर बन गई। कंपनी के ताजा शेयरहोल्डिंग आंकड़ों के मुताबिक सरकार के पास 49% हिस्सेदारी है। वहीं Vodafone Group की हिस्सेदारी 16.07% और Aditya Birla Group की हिस्सेदारी 9.57% है। बाकी 25.36% शेयर पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास हैं। इस तरह सरकार के पास कंपनी में सबसे बड़ी हिस्सेदारी जरूर है, लेकिन मंत्रालय के मुताबिक इससे कंपनी के रोजाना के संचालन में सरकार की सीधी भूमिका नहीं बनती।

Vi का मैनेजमेंट अपने फैसले खुद लेता है

संचार मंत्रालय ने कहा कि सरकार की हिस्सेदारी को कंपनी के डेली बिजनेस ऑपरेशन में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। Vodafone Idea अपने प्रबंधन और बोर्ड के जरिए कारोबारी फैसले लेती है। सरकार के मुताबिक उसकी हिस्सेदारी के बावजूद कंपनी में स्वीकार्य कॉरपोरेट गवर्नेंस प्रैक्टिस में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यानी कंपनी का संचालन सामान्य कॉरपोरेट ढांचे के तहत ही जारी है।

आर्थिक दबाव के बीच Vi के लिए अहम समय

सरकार का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब Vodafone Idea लंबे समय से आर्थिक दबाव से जूझ रही है। कंपनी पर भारी कर्ज और टेलीकॉम से जुड़ी देनदारियों का बोझ रहा है। इसके बावजूद कंपनी अपने नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में निवेश कर रही है। Vi ने हाल के समय में 4G और 5G नेटवर्क विस्तार पर भी खर्च बढ़ाया है।

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जून 2026 तिमाही में घाटा घटा

जून 2026 को समाप्त तिमाही में Vodafone Idea का कंसोलिडेटेड घाटा ₹3,754 करोड़ रहा। एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी का घाटा ₹6,608 करोड़ था। यानी सालाना आधार पर घाटे में कमी आई है। कंपनी का रेवेन्यू भी बढ़ा। जून तिमाही में Vodafone Idea की आय करीब 6% बढ़कर ₹11,689 करोड़ रही।

2018 के बाद पहली बार जुड़े नए ग्राहक

Vodafone Idea के लिए सबसे अहम बात यह रही कि कंपनी ने 2018 में Vodafone और Idea के विलय के बाद पहली बार किसी तिमाही में सब्सक्राइबर जोड़ने की रिपोर्ट की है। जून 2026 तिमाही के अंत में कंपनी का कुल सब्सक्राइबर बेस 19.31 करोड़ तक पहुंच गया। नए ग्राहकों का जुड़ना कंपनी के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय से उसका ग्राहक आधार दबाव में रहा है।

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सरकार की हिस्सेदारी, लेकिन नियंत्रण का दावा नहीं

Vodafone Idea में 49% हिस्सेदारी के कारण सरकार कंपनी की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर जरूर है लेकिन संचार मंत्रालय के ताजा स्पष्टीकरण से यह साफ किया गया है कि सरकार कंपनी के रोजमर्रा के कारोबारी फैसलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं कर रही है। अब कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने वित्तीय दबाव को कम करने, नेटवर्क में निवेश जारी रखने और ग्राहकों को बनाए रखने की होगी। जून तिमाही के आंकड़ों में घाटे में कमी और सब्सक्राइबर बढ़ने के संकेत कंपनी के लिए कुछ राहत जरूर देते हैं।