June 25, 2026

नीरव मोदी की मुश्किलें बढ़ीं! लंदन कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया का दावा माना, ₹108 करोड़ लौटाने का आदेश

Nirav Modi

Nirav Modi

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को ब्रिटेन की अदालत से बड़ा झटका लगा है। लंदन हाईकोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में फैसला सुनाते हुए नीरव मोदी को करीब 108 करोड़ रुपए की राशि चुकाने का आदेश दिया है। यह रकम एक पुराने कारोबारी ऋण और उस पर चढ़े ब्याज से जुड़ी है। फैसला ऐसे समय आया है जब नीरव मोदी पहले से ही भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा है और कई वित्तीय मामलों में घिरा हुआ है।

दुबई की कंपनी के लोन से जुड़ा विवाद

मामला नीरव मोदी से संबंधित दुबई स्थित कंपनी फायरस्टार डायमंड एफजेडई को दिए गए कर्ज का है। इस ऋण के लिए नीरव मोदी ने व्यक्तिगत गारंटर की भूमिका निभाई थी। बाद में जब कंपनी की देनदारियां बढ़ीं तो बैंक ने गारंटी के आधार पर रकम की मांग की। नीरव मोदी ने अदालत में तर्क दिया कि उसकी व्यक्तिगत गारंटी को लागू नहीं किया जा सकता, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

कोर्ट ने बैंक की मांग को बताया वैध

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी किया गया भुगतान नोटिस नियमों के अनुरूप था। कोर्ट ने कहा कि गारंटर के रूप में नीरव मोदी अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। फैसले के अनुसार उसे मूल बकाया राशि के साथ ब्याज का भुगतान भी करना होगा। ब्याज जोड़ने के बाद कुल देनदारी करीब 1.15 करोड़ डॉलर यानी लगभग 108 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।

सालों से चल रही थी कानूनी लड़ाई

बैंक ऑफ इंडिया इस राशि की वसूली के लिए लंबे समय से कानूनी प्रयास कर रहा था। बैंक की ओर से दायर यह दावा 2018 से अदालत में विचाराधीन था। अब आए फैसले को बैंक की बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में बैंक की रिकवरी प्रक्रिया को और मजबूत कर सकता है।

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PNB घोटाले से अलग मामला

यह मामला पंजाब नेशनल बैंक के चर्चित घोटाले से अलग है। हालांकि नीरव मोदी का नाम दोनों मामलों में जुड़ा हुआ है लेकिन बैंक ऑफ इंडिया का दावा केवल एक कारोबारी ऋण और उससे संबंधित गारंटी तक सीमित है। इसलिए अदालत का यह फैसला सीधे तौर पर ऋण वसूली और वित्तीय दायित्वों से जुड़ा हुआ है।

भारत में अब भी कई मामलों का सामना कर रहे नीरव मोदी

नीरव मोदी भारत में कई आपराधिक मामलों में वांछित है। उस पर बैंक धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और जांच में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप हैं। भारत सरकार लगातार उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है। ब्रिटेन की अदालतें पहले भी उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे चुकी हैं, लेकिन नीरव मोदी विभिन्न कानूनी मंचों पर अपील करके भारत आने से बचने की कोशिश कर रहा है।

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प्रत्यर्पण पर अंतिम लड़ाई जारी

हाल के महीनों में उसकी कई अपीलें और जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। इसके बावजूद वह अभी भी अंतरराष्ट्रीय अदालतों के जरिए राहत पाने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल, लंदन हाईकोर्ट का ताजा फैसला न केवल उसकी कानूनी परेशानियां बढ़ाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वित्तीय मामलों में उससे जुड़े दावों का पीछा अब भी दुनिया की अदालतें कर रही हैं।