August 12, 2026

 Ola Electric को सरकार से बड़ी राहत, ₹7,240 करोड़ तक के PLI इंसेंटिव का रास्ता साफ; 2031 तक मिली नई डेडलाइन

Ola Electric

Ola Electric

Ola Electric PLI Scheme: इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी सेल बनाने वाली कंपनी Ola Electric को बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के मोर्चे पर सरकार से बड़ी राहत मिली है। Ministry of Heavy Industries ने कंपनी को Advanced Chemistry Cell (ACC) Production Linked Incentive यानी PLI Scheme के तहत संशोधित टाइमलाइन को मंजूरी दे दी है। इसके बाद कंपनी को अपनी बैटरी सेल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और योजना की शर्तें पूरी करने के लिए 2031 तक का समय मिल गया है। इस मंजूरी से Ola Electric के लिए ₹7,240 करोड़ तक के संभावित PLI इंसेंटिव हासिल करने का रास्ता खुल गया है। इससे कंपनी के बैटरी सेल कारोबार में लंबे समय से बनी इंसेंटिव और मैन्युफैक्चरिंग टाइमलाइन को लेकर अनिश्चितता भी कम हुई है।

6 GWh बैटरी क्षमता लगाने की तैयारी में Ola Electric

Ola Electric ने बताया है कि वह मौजूदा तिमाही के अंत तक 6 GWh की बैटरी सेल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी इसमें NMC यानी Nickel Manganese Cobalt और LFP यानी Lithium Iron Phosphate दोनों तरह की बैटरी तकनीक पर काम करेगी। शुरुआत में Ola Electric को सरकार की ₹18,100 करोड़ की ACC PLI Scheme के तहत 20 GWh क्षमता आवंटित की गई थी। हालांकि बाद में कंपनी ने अपनी योजना को घटाकर 6 GWh कर दिया। कंपनी का कहना था कि यह उसके इलेक्ट्रिक व्हीकल और बैटरी सेल कारोबार की मौजूदा मांग के अनुरूप है। नई टाइमलाइन से कंपनी को अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने और PLI स्कीम की आवश्यक शर्तों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

5 साल तक मिल सकता है इंसेंटिव

संशोधित व्यवस्था के तहत Ola Electric के पास 2031 तक पांच साल की इंसेंटिव विंडो होगी। कंपनी के लिए यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि अब बैटरी सेल उत्पादन से जुड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पहले की तुलना में ज्यादा समय उपलब्ध होगा। ACC PLI Scheme के तहत कंपनियों को पांच साल की अवधि में अपने उत्पादों में 60% तक घरेलू वैल्यू एडिशन हासिल करना होता है। सरकार ने पहले इस सेक्टर में देरी के पीछे प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी, विशेष मशीनरी की उपलब्धता और तकनीकी जानकारी जैसी चुनौतियों का भी जिक्र किया था।

Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन का इस्तीफा, फरवरी 2027 तक संभालेंगे जिम्मेदारी

दो साल में ₹225 करोड़ प्रति GWh निवेश की शर्त पूरी नहीं हुई थी

Ola Electric के लिए PLI योजना की राह पूरी तरह आसान नहीं रही है। कंपनी निर्धारित अवधि में प्रति GWh ₹225 करोड़ के निवेश की शर्त पूरी नहीं कर पाई थी। इसके चलते उसकी PLI पात्रता को लेकर सवाल खड़े हुए थे। कंपनी ने सरकार की ओर से देरी को लेकर उठाए गए सवालों के बाद अपने वित्तीय परिणामों में करीब ₹57 करोड़ की पेनल्टी प्रोविजन भी बनाई थी। हालांकि, बाद में सरकार से छूट की मांग किए जाने के बाद जून तिमाही के नतीजों में इस प्रोविजन को वापस कर दिया गया। Ola Electric के ऑडिटर BSR & Co. ने भी इस प्रोविजन को हटाए जाने पर सवाल उठाया था, क्योंकि 30 जून तक सरकार की अंतिम मंजूरी सामने नहीं आई थी।

अब अगले चरण में शुरू हो सकता है इंसेंटिव

कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भाविश अग्रवाल के अनुसार, Ola Electric संशोधित टाइमलाइन से भी आगे चल रही है। कंपनी को उम्मीद है कि वह जल्द ही PLI इंसेंटिव हासिल करने की स्थिति में आ सकती है और अगली तिमाही से इंसेंटिव मिलने की शुरुआत हो सकती है। नई मंजूरी के बाद अब कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी बैटरी सेल मैन्युफैक्चरिंग को तेजी से बढ़ाना और सरकार की PLI शर्तों के अनुरूप घरेलू उत्पादन व वैल्यू एडिशन हासिल करना है।

NRI बनने से पहले कर लें ये 5 जरूरी काम, विदेश जाने के बाद प्रॉपर्टी और बैंकिंग में नहीं आएगी दिक्कत

इलेक्ट्रिक व्हीकल कारोबार के लिए भी अहम कदम

Ola Electric के लिए बैटरी सेल मैन्युफैक्चरिंग सिर्फ PLI इंसेंटिव हासिल करने का मामला नहीं है। कंपनी अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल कारोबार के लिए बैटरी की सप्लाई को मजबूत करने की दिशा में भी काम कर रही है। यदि कंपनी 6 GWh क्षमता को तय समय पर स्थापित कर लेती है और आगे उत्पादन को सफलतापूर्वक बढ़ाती है, तो इससे उसके EV कारोबार के लिए बैटरी सप्लाई चेन मजबूत हो सकती है। साथ ही घरेलू स्तर पर बैटरी निर्माण बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम करने की सरकार की योजना को भी समर्थन मिल सकता है। फिलहाल सरकार की मंजूरी के बाद Ola Electric के लिए PLI योजना को लेकर सबसे बड़ी अड़चन दूर हो गई है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि कंपनी 2031 तक निर्धारित लक्ष्यों को कितनी तेजी से पूरा करती है और संभावित ₹7,240 करोड़ के इंसेंटिव में से वास्तविक लाभ कितना हासिल कर पाती है।