July 14, 2026

CPI Inflation: जून में खुदरा महंगाई 4.38% पर पहुंची, खाने-पीने की चीजों ने बढ़ाई चिंता

CPI Inflation

जून में फिर बढ़ी महंगाई की मार

देश में महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। जून 2026 में खुदरा महंगाई  (CPI Inflation) दर बढ़कर 4.38 प्रतिशत हो गई है। यह लगातार छठा महीना है जब रिटेल महंगाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में खुदरा महंगाई दर 2.74 प्रतिशत थी, जो धीरे-धीरे बढ़ते हुए जून में 4.38 प्रतिशत तक पहुंच गई। इस बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी को माना जा रहा है।

खाने-पीने की चीजों की महंगाई ने बढ़ाई परेशानी

जून महीने में खाद्य महंगाई दर में भी तेजी देखने को मिली। फूड इन्फ्लेशन बढ़कर 5.32 प्रतिशत हो गया जबकि मई में यह आंकड़ा 4.38 प्रतिशत था। आलू, अदरक और अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से आम लोगों के घरेलू बजट पर असर पड़ा है। रोजमर्रा की जरूरतों की चीजें महंगी होने से उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त भार बढ़ रहा है।

RBI के 4 प्रतिशत लक्ष्य से ऊपर पहुंची महंगाई

जून की महंगाई दर जनवरी 2025 के बाद पहली बार रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के औसत लक्ष्य से ऊपर पहुंची है। हालांकि यह अभी भी RBI की तय सीमा यानी 2 प्रतिशत से 6 प्रतिशत के दायरे में है, लेकिन अगर कीमतों में आगे भी तेजी जारी रहती है तो केंद्रीय बैंक के सामने ब्याज दरों को लेकर चुनौती बढ़ सकती है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्ज की लागत पर पड़ सकता है जिससे आर्थिक गतिविधियों पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।

मानसून और ऊर्जा कीमतों को लेकर RBI सतर्क

रिजर्व बैंक ने हाल ही में महंगाई को लेकर अपने अनुमान में बदलाव किया था। कमजोर मानसून की आशंका और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए RBI ने महंगाई अनुमान को 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया था। केंद्रीय बैंक की नजर अब मानसून की स्थिति, कृषि उत्पादन और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है।

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नए CPI Inflation इंडेक्स के बाद बदले हैं महंगाई के आंकड़े

महंगाई के मौजूदा आंकड़ों की तुलना पुराने साल के आंकड़ों से सीधे नहीं की जा सकती, क्योंकि जनवरी 2026 से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की नई सीरीज लागू की गई है। नई सीरीज में 2024 को बेस ईयर बनाया गया है। इसके तहत जनवरी में संशोधित खुदरा महंगाई 2.74 प्रतिशत दर्ज हुई थी। इसके बाद फरवरी में 3.21 प्रतिशत, मार्च में 3.40 प्रतिशत, अप्रैल में 3.48 प्रतिशत और मई में 3.93 प्रतिशत रही। पुरानी CPI सीरीज में बेस ईयर 2012 था, जिसमें दिसंबर और नवंबर के दौरान महंगाई दर काफी कम दर्ज की गई थी।

नए इंडेक्स में लोगों के खर्च के तरीके को मिली जगह

सरकार ने नए महंगाई इंडेक्स को साल 2023-24 के हाउसहोल्ड कंजम्पशन एक्सपेंडिचर सर्वे के आधार पर तैयार किया है। इसमें लोगों के खर्च करने के बदलते पैटर्न को शामिल किया गया है। नए इंडेक्स में कुछ जरूरी वस्तुओं की हिस्सेदारी बढ़ाई गई है, जबकि उन खाद्य वस्तुओं का प्रभाव कम किया गया है जिनकी कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।

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आने वाले महीनों में महंगाई पर रहेगी नजर

महंगाई में लगातार बढ़ोतरी सरकार और RBI दोनों के लिए चिंता का विषय है। अगर खाद्य वस्तुओं की कीमतें और बढ़ती हैं तो इसका असर आम जनता के खर्च पर दिखाई देगा। आने वाले समय में मानसून, फसल उत्पादन और वैश्विक बाजार की परिस्थितियां तय करेंगी कि महंगाई का रुख किस दिशा में जाता है।