June 26, 2026

हवाई यात्रा करने वालों को लग सकता है झटका! एयर टिकट के दाम 25% तक बढ़ने की आशंका

Aviation Fair

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आने वाले समय में हवाई सफर करना पहले से ज्यादा महंगा हो सकता है। ग्लोबल कंसल्टिंग कंपनी मैकिंजी की एक नई रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि एयरलाइंस कंपनियों की बढ़ती ईंधन लागत के कारण हवाई टिकटों की कीमतों में 25% तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। दुनिया के कई हिस्सों में जारी भू-राजनीतिक तनाव और जेट फ्यूल की सीमित उपलब्धता ने एयरलाइन उद्योग की चिंता बढ़ा दी है।

जेट फ्यूल बना एयरलाइंस के लिए बड़ी चुनौती

रिपोर्ट के अनुसार किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च में जेट फ्यूल का हिस्सा लगभग 30% तक होता है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का सीधा असर कंपनियों की लागत पर पड़ता है। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो एयरलाइंस कंपनियां टिकट महंगे कर इस अतिरिक्त खर्च की भरपाई कर सकती हैं।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है क्रैक स्प्रेड

कच्चे तेल और उससे तैयार होने वाले जेट फ्यूल की कीमतों के बीच अंतर को क्रैक स्प्रेड कहा जाता है। सामान्य परिस्थितियों में यह अंतर 20 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है लेकिन मैकिंजी का अनुमान है कि 2026 में यह बढ़कर 50 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतना बड़ा अंतर एयरलाइंस कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ाएगा और यात्रियों को महंगे टिकटों का सामना करना पड़ सकता है।

ग्लोबल सप्लाई पर पड़ा असर

खाड़ी देशों और एशिया के प्रमुख निर्यातक देशों से जेट फ्यूल की सप्लाई में कमी आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव बढ़ गया है। ये क्षेत्र दुनिया की कुल जेट फ्यूल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा संभालते हैं। हाल के तनावपूर्ण हालात के बाद कई देशों ने अपने ईंधन निर्यात को सीमित किया है। इससे वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और एयरलाइंस कंपनियों के लिए ईंधन खरीदना महंगा हो गया है।

रिफाइनरियां भी नहीं बढ़ा पा रहीं उत्पादन

रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया की कई बड़ी रिफाइनरियां पहले से ही लगभग पूरी क्षमता पर काम कर रही हैं। ऐसे में जेट फ्यूल का उत्पादन तेजी से बढ़ाना संभव नहीं है। बाजार में मांग पूरी करने के लिए मौजूदा स्टॉक का इस्तेमाल किया जा रहा है लेकिन यदि सप्लाई संकट लंबा चला तो कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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कच्चे तेल में गिरावट, फिर भी राहत नहीं

हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड 75 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जो कुछ महीने पहले के मुकाबले काफी कम है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कच्चे तेल की कीमतें कम होने से जेट फ्यूल सस्ता नहीं होगा। सप्लाई चेन की समस्याएं और सीमित उत्पादन क्षमता अभी भी बाजार को प्रभावित कर रही हैं।

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यात्रियों पर होगा असर

यदि जेट फ्यूल महंगा बना रहता है तो एयरलाइंस कंपनियां घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों रूट्स पर किराया बढ़ा सकती हैं। खासकर त्योहारों, छुट्टियों और व्यस्त सीजन में टिकटों की कीमतों में ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। एविएशन सेक्टर से जुड़े जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में यात्रियों को यात्रा की योजना पहले से बनाकर टिकट बुक करना पड़ सकता है ताकि बढ़ती कीमतों का असर कम हो सके।