ITR भरते समय सभी बैंक खातों की दें जानकारी, बंद अकाउंट छिपाया तो अटक सकता है टैक्स रिफंड
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अगर आप असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने जा रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT) के नए नियमों के तहत अब टैक्सपेयर्स को वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सक्रिय रहे सभी बैंक खातों की जानकारी ITR में देना अनिवार्य होगा। यदि किसी बैंक खाते की जानकारी छिपाई गई या गलत विवरण भरा गया, तो टैक्स विभाग नोटिस भेज सकता है। इतना ही नहीं, आपका टैक्स रिफंड भी अटक सकता है।
किन बैंक खातों की जानकारी देना अनिवार्य है?
नए नियमों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सक्रिय रहे हर बैंक खाते का विवरण ITR में देना होगा। इसमें केवल सैलरी अकाउंट ही नहीं, बल्कि सेविंग्स अकाउंट, करंट अकाउंट, जॉइंट अकाउंट और वर्ष के दौरान बंद किए गए बैंक खाते भी शामिल हैं। कई लोग यह मान लेते हैं कि जिस खाते में लेन-देन नहीं हुआ या जिसे बाद में बंद कर दिया गया, उसकी जानकारी देना जरूरी नहीं है। लेकिन आयकर विभाग के नियमों के मुताबिक, यदि कोई खाता वित्त वर्ष के किसी भी समय सक्रिय रहा है, तो उसका विवरण देना अनिवार्य होगा। हालांकि बैंक द्वारा आधिकारिक रूप से Dormant (निष्क्रिय) घोषित किए गए खातों को इस नियम से छूट दी गई है।
गलत जानकारी देने पर क्या होगा?
यदि आपने किसी बैंक खाते की जानकारी छिपाई या गलत विवरण दर्ज किया, तो आयकर विभाग की ओर से स्पष्टीकरण मांगने के लिए नोटिस जारी किया जा सकता है। बैंक खातों का डेटा अब PAN, AIS (Annual Information Statement) और Form 26AS से मिलान किया जाता है। ऐसे में किसी भी तरह का डेटा मिसमैच आपके लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
ITR टैक्स रिफंड पाने के लिए सही बैंक अकाउंट जरूरी
अगर आपका टैक्स रिफंड बनता है, तो इनकम टैक्स विभाग उसे केवल उसी बैंक खाते में भेजता है, जो ई-फाइलिंग पोर्टल पर वैलिडेट और PAN से लिंक हो। इसलिए ITR भरने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता PAN से लिंक हो, ई-फाइलिंग पोर्टल पर वैलिडेट हो और उसका IFSC कोड सही दर्ज हो। बैंक मर्जर के बाद कई खातों के IFSC कोड बदल चुके हैं, इसलिए उन्हें भी एक बार जरूर जांच लें। गलत अकाउंट या पुराना IFSC भरने पर टैक्स रिफंड में देरी हो सकती है।
ब्याज से हुई कमाई भी दिखानी होगी
केवल बैंक खाते की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है। सेविंग्स अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रेकरिंग डिपॉजिट (RD) पर मिलने वाले ब्याज को भी ITR में ‘Income from Other Sources’ के तहत दिखाना जरूरी है। भले ही बैंक ने उस पर TDS न काटा हो, फिर भी वह आपकी कुल आय का हिस्सा माना जाएगा। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले बैंक स्टेटमेंट का मिलान Form 26AS और Annual Information Statement (AIS) से जरूर कर लें।
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आम टैक्सपेयर्स पर क्या पड़ेगा असर?
इस नए नियम के बाद नौकरीपेशा लोगों, पेंशनर्स और छोटे कारोबारियों को ITR भरते समय पहले से अधिक सावधानी बरतनी होगी। अब केवल मुख्य बैंक खाते की जानकारी देकर रिटर्न फाइल करना पर्याप्त नहीं होगा। सभी सक्रिय और बंद किए गए खातों का रिकॉर्ड तैयार रखना जरूरी होगा। इससे टैक्स व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और गलत जानकारी देने की संभावना कम होगी।
