June 26, 2026

World Bank ने भारत के लिए 1.5 अरब डॉलर की फंडिंग मंजूर की, निजी क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने और आर्थिक सुधारों को मिलेगा बड़ा सहारा

World Bank

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भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और निजी क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए विश्व बैंक (World Bank) ने 1.5 अरब डॉलर (करीब ₹12,500 करोड़) की वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है। यह फंडिंग भारत में निजी निवेश बढ़ाने, कारोबार को आसान बनाने और रोजगार सृजन को तेज करने के उद्देश्य से दी जा रही है। विश्व बैंक के बोर्ड ऑफ एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स ने “बूस्टिंग जॉब क्रिएशन इन द प्राइवेट सेक्टर डेवलपमेंट पॉलिसी फाइनेंसिंग (DPF) ऑपरेशन” के तहत इस वित्तीय सहायता को मंजूरी दी है।

20 वर्षों में 1.1 करोड़ युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद

विश्व बैंक के अनुसार यह कार्यक्रम उन संरचनात्मक सुधारों को समर्थन देगा, जिनसे आने वाले दो दशकों में कार्यबल में शामिल होने वाले करीब 1.1 करोड़ युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। भारत में हर साल बड़ी संख्या में युवा नौकरी की तलाश में श्रम बाजार में प्रवेश करते हैं। ऐसे में निजी क्षेत्र की भूमिका रोजगार सृजन में और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।

कारोबार को आसान बनाने वाले सुधारों को मिलेगा समर्थन

विश्व बैंक ने कहा कि यह फंडिंग हाल के वर्षों में किए गए कई महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। इनमें टैक्स प्रणाली को सरल बनाना, व्यापार को बढ़ावा देना, निवेश प्रक्रियाओं को आसान करना और कारोबारी माहौल को बेहतर बनाना शामिल है। इसके अलावा यह योजना उद्यमिता को बढ़ावा देने, नए व्यवसाय शुरू करने में आने वाली बाधाओं को कम करने और कंपनियों को पूंजी उपलब्ध कराने पर भी फोकस करेगी।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर

इस कार्यक्रम का एक प्रमुख लक्ष्य श्रम बाजार में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना भी है। विश्व बैंक का मानना है कि महिलाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ने से भारत की आर्थिक वृद्धि को नई गति मिल सकती है। व्यापार और निवेश प्रक्रियाओं को आसान बनाने के साथ-साथ महिलाओं और छोटे कारोबारियों को वित्तीय संसाधनों तक बेहतर पहुंच दिलाने पर भी जोर दिया जाएगा।

श्रम कानूनों में सुधार का मिलेगा फायदा

विश्व बैंक ने नवंबर 2025 में भारत सरकार द्वारा 29 अलग-अलग श्रम कानूनों को चार व्यापक लेबर कोड्स में समाहित करने के फैसले का भी उल्लेख किया है। इन लेबर कोड्स का उद्देश्य नियमों को सरल बनाना, अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाना और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करते हुए व्यवसायों के लिए अधिक अनुकूल माहौल तैयार करना है।

6 साल में 15 करोड़ से ज्यादा नए रोजगार

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में रोजगार की स्थिति में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। 2017-18 में देश में कुल रोजगार संख्या 45.2 करोड़ थी, जो 2023-24 में बढ़कर 60.4 करोड़ हो गई। यानी छह वर्षों में 15 करोड़ से अधिक नए रोजगार जुड़े। इसी अवधि में बेरोजगारी दर 6% से घटकर 3.2% पर आ गई। साथ ही करीब 90 लाख महिलाओं ने नियमित वेतन वाली नौकरियों में प्रवेश किया।

विकसित भारत 2047 विजन को मिलेगा समर्थन

विश्व बैंक ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत सरकार के “विकसित भारत 2047” विजन के अनुरूप है। इसका उद्देश्य निजी निवेश को बढ़ावा देना, उद्योगों के विस्तार के लिए अनुकूल माहौल बनाना और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करना है। यह योजना विश्व बैंक समूह के भारत के लिए 2026-31 कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क के तहत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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तीन प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा फोकस

इस कार्यक्रम के तहत मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों पर काम किया जाएगा-

कारोबार के लिए बेहतर माहौल तैयार करना

उद्योगों और निवेशकों के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा।

व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना

वैश्विक निवेश आकर्षित करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को मजबूत करने के लिए सुधार किए जाएंगे।

निजी पूंजी को प्रोत्साहित करना

व्यवसाय विस्तार और रोजगार सृजन के लिए निजी क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा।

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World Bank ने भारत के सुधारों की सराहना की

दक्षिण एशिया के लिए विश्व बैंक के उपाध्यक्ष जोहान्स जट (Johannes Zutt) ने कहा कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत निजी निवेश को आकर्षित करने और रोजगार सृजन के लिए अपने सुधार एजेंडे पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक नीतियां और सुधार आने वाले वर्षों में रोजगार और विकास के नए अवसर पैदा कर सकते हैं।

MSME और ग्रामीण महिलाओं को भी मिलेगा लाभ

यह कार्यक्रम विश्व बैंक समूह की निजी क्षेत्र इकाई इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन (IFC) की हालिया पहलों को भी मजबूती देगा। IFC पहले से ही MSME सेक्टर और ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को आसान ऋण उपलब्ध कराने के लिए निवेश कर रही है। नई फंडिंग से छोटे व्यवसायों, स्टार्टअप्स और महिला उद्यमियों को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।